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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के इलामी गांव में एक मामूली दिखने वाला विवाद देखते ही देखते खौफनाक मोड़ ले बैठा। गुटखा नहीं मिलने पर भड़के एक युवक ने कट्टा तान दिया और बेटे को जान से मारने की धमकी दे डाली। यह मामला अब अदालत के फैसले के साथ खत्म तो हो गया, लेकिन यह घटना समाज में बढ़ते गुस्से और अवैध हथियारों के खतरे की गंभीर तस्वीर भी दिखा गई।
मामूली मांग, बड़ा बवाल
घटना 5 नवंबर 2020 की है। इलामी गांव के रहने वाले इमादुरुल रहमान के बेटे अबुल कलाम आजाद अपनी किराना दुकान पर बैठे थे। रोज की तरह ग्राहक आ-जा रहे थे। इसी दौरान गांव का ही सलीम शेख दुकान पर पहुंचा और ‘विमल गुटखा’ मांगा। दुकान में गुटखा खत्म हो चुका था। जैसे ही अबुल कलाम ने यह बात कही, माहौल अचानक बदल गया। बताया जाता है कि आरोपी सलीम शेख इस बात से इतना नाराज हो गया कि उसने तुरंत अपनी जेब से देसी कट्टा निकाल लिया।
दुकान से घर तक दहशत का पीछा
कट्टा देखते ही दुकान पर मौजूद लोग सहम गए। आरोपी ने बेटे को जान से मारने की धमकी देनी शुरू कर दी। हालात बिगड़ते देख अबुल कलाम जान बचाने के लिए दुकान से भागकर अपने घर के आंगन की ओर पहुंचे। लेकिन आरोपी का गुस्सा यहीं नहीं रुका। वह कट्टा लहराते हुए उनके पीछे घर तक पहुंच गया। घर के आंगन में भी वह गाली-गलौज करता रहा और धमकियां देता रहा। इस पूरी घटना से आसपास के लोगों में दहशत फैल गई।
परिवार और पड़ोसियों ने दिखाई हिम्मत
जब हालात ज्यादा बिगड़ने लगे, तब इमादुरुल रहमान ने हिम्मत जुटाई। उन्होंने पड़ोसी जर्जिश शेख और परिवार के अन्य सदस्यों को आवाज दी। सबने मिलकर आरोपी को पकड़ लिया। तलाशी लेने पर उसके पास से एक लोडेड कट्टा और लुंगी में छिपाकर रखा गया एक अतिरिक्त कारतूस मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और आरोपी को कानून के हवाले कर दिया गया।
जांच से लेकर अदालत तक चला लंबा सफर
मामले में पाकुड़ मुफस्सिल थाना में केस दर्ज हुआ। पुलिस ने जांच के दौरान हथियार बरामदगी और गवाहों के बयान के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा। सत्र वाद संख्या 185/2022 के तहत जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडेय की अदालत में सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता लुकस कुमार हेमब्रम ने मजबूत पक्ष रखा। गवाहों और सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
अदालत का सख्त संदेश
अदालत ने सलीम शेख को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1A) के तहत 7 साल के सश्रम कारावास और 8 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर 6 महीने अतिरिक्त जेल काटनी होगी। इसके अलावा धारा 26(2) के तहत भी 7 साल की जेल और 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर 3 महीने अतिरिक्त कैद का प्रावधान किया गया है।
कानून का डर ही रोक सकता है अपराध
इलाके के लोगों का कहना है कि अदालत के इस फैसले से एक साफ संदेश गया है कि हथियार के दम पर डराने-धमकाने वालों को कानून सख्त सजा देगा। साथ ही यह भी जरूरी है कि समाज में आपसी बातचीत और संयम की संस्कृति मजबूत हो, ताकि छोटे विवाद बड़े अपराध में न बदलें।
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