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Ranchi : सुबह का वक्त था। पहाड़ी मंदिर परिसर में रोज की तरह श्रद्धालुओं की आवाजाही चल रही थी। तभी अचानक ढोलक की थाप और संवादों की आवाज गूंजी। लोग ठिठक गए। सामने नुक्कड़ नाटक चल रहा था। कहानी नशे की थी, टूटते परिवार की थी और फिर संभलते जीवन की। यही वह पल था, जब नशामुक्ति का संदेश कागजों से निकलकर सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचने लगा। यह दृश्य नालसा की ‘डॉन योजना 2025’ के तहत डालसा रांची द्वारा आयोजित विधिक जागरूकता अभियान का हिस्सा था। इस अभियान का मकसद साफ था। युवाओं को नशे से दूर रखना और उन्हें यह समझाना कि नशा सिर्फ शरीर नहीं, पूरे परिवार और समाज को खोखला कर देता है।
जब कानून ने अपनाया संवेदनशील रास्ता
झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजित नारायण प्रसाद के निर्देश और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डालसा रांची अनिल कुमार मिश्रा-1 के नेतृत्व में यह अभियान 5 जनवरी से 12 जनवरी 2026 तक चलाया जा रहा है। खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ कानून की बातें नहीं हुईं, बल्कि संवेदना और संवाद को केंद्र में रखा गया।
डिजिटल दुनिया में युवाओं तक पहुंचने की कोशिश
10 जनवरी को अभियान का फोकस डिजिटल और मीडिया प्लेटफॉर्म पर रहा। सोशल मीडिया पर पोस्टर, वीडियो और छोटे संदेश साझा किए गए। व्हाट्सएप ग्रुप और वेबसाइट के जरिए नशामुक्ति से जुड़ी जानकारी फैलाई गई। उद्देश्य यही था कि मोबाइल स्क्रीन के जरिए वह युवा भी जुड़ें, जो शायद किसी सभागार या कार्यक्रम तक नहीं पहुंच पाते।
रेडियो और टीवी से घर-घर पहुंचा संदेश
रांची दूरदर्शन पर डालसा सचिव राकेश रौशन ने नशा उन्मूलन और डॉन योजना पर खुलकर बात की। चर्चा के दौरान यह बताया गया कि नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति को दंड से पहले सहारे और मार्गदर्शन की जरूरत होती है। इस संवाद में मध्यस्थ मधुकर और लाइफ सेवर्स एनजीओ के प्रमुख अतुल गेरा भी शामिल रहे। रेडियो सिटी एफएम पर भी यही संदेश अलग अंदाज में गूंजा। आरजे के सवाल और डालसा सचिव के जवाब सीधे आम लोगों से जुड़े थे। रेडियो की तरंगों पर नशामुक्ति की बात सुनकर कई श्रोता खुद को उस कहानी का हिस्सा महसूस कर रहे थे।
नुक्कड़ नाटक बना सबसे सशक्त माध्यम
शाम होते-होते पहाड़ी मंदिर परिसर में नुक्कड़ नाटक लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। निर्देशक और अभिनेता अशोक गोप के साथ उनकी टीम ने ऐसा अभिनय किया कि कई दर्शक भावुक हो उठे। नाटक में दिखाया गया कि कैसे नशा एक हंसते-खेलते घर को उजाड़ देता है और फिर जागरूकता ही उसे बचा सकती है। कलाकारों का अभिनय सिर्फ मनोरंजन नहीं था, वह एक आईना था, जिसमें कई लोगों ने अपनी या अपने आसपास की कहानी देखी।
संदेश साफ है
डालसा सचिव राकेश रौशन का कहना है कि नालसा डॉन योजना का मकसद सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि सोच बदलना है। जब समाज जागरूक होगा, तभी नशे के खिलाफ लड़ाई मजबूत होगी।
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