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Garhwa (Nityanand Dubey) : गढ़वा की रात उस दिन कुछ अलग थी। ठंड असहनीय थी। सड़कें सन्नाटे में डूबी थीं और लोग अपने घरों में रजाइयों के भीतर सिमट चुके थे। लेकिन स्टेशन, बस स्टैंड और फुटपाथों पर अब भी कई ऐसे चेहरे थे, जिनके लिए रात सिर्फ अंधेरा और ठंड लेकर आती है।
इसी ठिठुरती रात में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव निभा रंजना लकड़ा अपने काफिले के साथ सड़कों पर निकलीं। उद्देश्य सिर्फ कंबल बांटना नहीं था, बल्कि उन लोगों तक पहुंचना था जिन्हें अक्सर समाज देखना भूल जाता है।
फुटपाथ पर कांपती जिंदगियां
स्टेशन के बाहर एक बुजुर्ग अखबार में लिपटे ठंड से कांप रहे थे। पास ही एक महिला अपने छोटे बच्चे को सीने से लगाए बैठी थी। ठंड इतनी तेज थी कि हाथ सुन्न हो चुके थे। ऐसे में जब प्रशासन की गाड़ी रुकी और कंबल निकले, तो कई लोगों को पहले भरोसा ही नहीं हुआ।
निभा रंजना लकड़ा ने खुद आगे बढ़कर कंबल ओढ़ाए। यह महज औपचारिकता नहीं थी, बल्कि एक इंसानी स्पर्श था। कंबल ओढ़ते ही बुजुर्ग की आंखों में राहत झलक आई।
सिर्फ मदद नहीं, हाल भी जाना
कंबल देते वक्त सचिव हर व्यक्ति से रुककर बात करती रहीं। किसी से नाम पूछा, किसी से हालचाल। किसी ने भोजन की कमी बताई तो किसी ने बीमारी की। सचिव ने आश्वस्त किया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय उनके साथ खड़ा है।
प्रशासन जब जमीन पर उतरे
आधी रात सड़कों पर उतरकर मदद करना आसान नहीं होता। लेकिन यह वही पल था जब प्रशासन और आम आदमी के बीच की दूरी खत्म होती नजर आई। डीएलएसए की टीम ने शहर के कई इलाकों में जाकर ऐसे लोगों को चिन्हित किया जो खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे थे।
रैन बसेरा की ओर बढ़ाया कदम
सचिव ने बेसहारा लोगों को रैन बसेरों के बारे में बताया और वहां जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ठंड जानलेवा हो सकती है और सुरक्षित आश्रय लेना जरूरी है। कई लोग पहली बार यह जानकारी पाकर रेन बसेरों की ओर जाने को तैयार दिखे।
इंसानियत की गर्माहट
इस पूरी रात में जो बांटा गया, वह सिर्फ कंबल नहीं था। वह भरोसा था, अपनापन था और यह एहसास था कि कोई उन्हें देख भी रहा है। जब कंबल ओढ़कर लोग चैन से लेटे, तो उनके चेहरे पर सुकून साफ दिखा।
अभियान आगे भी रहेगा
डीएलएसए सचिव ने कहा कि यह पहल आगे भी जारी रहेगी ताकि ठंड के कारण कोई जान न जाए। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मचारी और पीएलवी सदस्य भी इस अभियान में पूरी संवेदनशीलता के साथ जुटे रहे।
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