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Ranchi : रोजाना न्याय की जिम्मेदारी निभाने वाले न्यायिक पदाधिकारी, कर्मचारी और अधिवक्ता अक्सर अपनी सेहत को पीछे छोड़ देते हैं। फाइलों का बोझ, लगातार सुनवाई और समय की कमी। इसी भागदौड़ के बीच रांची डालसा और मेदांता अस्पताल की एक पहल ने उन्हें खुद के स्वास्थ्य के लिए रुकने का मौका दिया। आज यानी 13 जनवरी को रांची सिविल कोर्ट का कॉन्फ्रेंस हॉल कुछ देर के लिए अदालत से ज्यादा एक हेल्थ सेंटर जैसा नजर आया। कुर्सियों पर बैठे लोग आज फैसलों पर नहीं, अपनी रिपोर्ट पर नजरें टिकाए थे।
“स्वास्थ्य ही असली धन”
स्वास्थ्य जांच शिविर के दौरान न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 ने साफ शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य के बिना कोई भी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई जा सकती। उन्होंने बताया कि नियमित जांच से कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती दौर में ही पकड़ा जा सकता है। यह बात वहां मौजूद कई कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के चेहरे पर सहमति के भाव से झलक रही थी। कुछ लोग पहली बार ईसीजी करा रहे थे, तो कुछ अपनी बढ़ी हुई शुगर रिपोर्ट देखकर सतर्क हो गए।
कोर्ट परिसर में बदला माहौल
दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ यह शिविर दिन भर चर्चा का विषय बना रहा। जहां आमतौर पर बहस और कानूनी दलीलें सुनाई देती हैं, वहां आज ब्लड प्रेशर, शुगर और हृदय जांच की बातें हो रही थीं। मेदांता अस्पताल की टीम ने न सिर्फ जांच की, बल्कि हर व्यक्ति को उसकी रिपोर्ट समझाकर जरूरी सलाह भी दी। किसी को खानपान सुधारने की सलाह मिली, तो किसी को नियमित वॉक की।

एक कर्मचारी की बात
एक न्यायिक कर्मचारी ने हौले से कहा कि अक्सर समय की कमी के कारण अस्पताल जाना टलता रहता है। अदालत परिसर में ही यह सुविधा मिलना बहुत राहत भरा अनुभव रहा। इससे यह एहसास भी हुआ कि संस्थान हमारी सेहत को लेकर भी सोचता है।
डॉक्टरों की सलाह, जीवनशैली पर जोर
मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों ने साफ कहा कि तनाव और अनियमित दिनचर्या आज की सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने कम नमक, संतुलित भोजन, नियमित जांच और पर्याप्त नींद को जरूरी बताया। ईसीजी, शुगर, ब्लड प्रेशर, एसपीओ-2, पीएफटी और सामान्य चिकित्सीय जांच के साथ यह शिविर लोगों के लिए आंख खोलने वाला साबित हुआ।

छोटी पहल, बड़ा संदेश
यह स्वास्थ्य शिविर सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक संदेश था कि न्याय देने वालों की सेहत भी उतनी ही जरूरी है। अदालत की व्यस्त दिनचर्या के बीच कुछ घंटे अपने लिए निकालना भी न्याय की प्रक्रिया का ही हिस्सा है। दिन के अंत में कई लोग मुस्कुराते हुए लौटे। हाथ में रिपोर्ट थी और मन में यह संकल्प कि अब सेहत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
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