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News Samvad : ज्यादातर पेरेंट्स अपने बच्चों को खास मौकों पर अच्छा महकता महसूस कराना चाहते हैं। इसके लिए वे परफ्यूम या बॉडी स्प्रे का इस्तेमाल भी करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत बच्चों की सेहत और स्किन के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
परफ्यूम में क्या होता है?
अधिकांश परफ्यूम में 78% से 95% तक डिनैचर्ड एथाइल अल्कोहल, एसेंशियल ऑयल्स, ग्लिसरीन और फ्थेलेट्स (phthalates) जैसे केमिकल होते हैं। यही तत्व बच्चों की नाजुक स्किन और फेफड़ों पर बुरा असर डाल सकते हैं।
बच्चों पर परफ्यूम क्यों खतरनाक है?
बच्चों की स्किन बेहद पतली और संवेदनशील होती है। परफ्यूम के केमिकल स्किन से अब्जॉर्ब होकर ब्लडस्ट्रीम तक पहुंच जाते हैं, जिससे रैशेज, खुजली, जलन और एलर्जी हो सकती है। वहीं, तेज खुशबू बच्चों के अधूरे विकसित फेफड़ों पर असर डालकर सांस लेने में परेशानी, चक्कर या सिरदर्द जैसी समस्या पैदा कर सकती है।
क्या हैं सावधानियां?
बच्चों के लिए ऐसा परफ्यूम चुनें जिसमें नेचुरल इंग्रेडिएंट्स हों।
अल्कोहल, आर्टिफिशियल फ्रेगरेंस और फ्थेलेट्स वाले प्रोडक्ट से बचें।
परफ्यूम सीधे स्किन पर न लगाएं, केवल कपड़ों पर हल्का स्प्रे करें।
गले, चेहरे और कटे-फटे हिस्सों पर परफ्यूम बिल्कुल न लगाएं।
अगर बच्चे को रैशेज या सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या बेबी परफ्यूम सुरक्षित हैं?
मार्केट में मिलने वाले बेबी परफ्यूम या किड्स फ्रेगरेंस को भले ही ‘माइल्ड’ बताया जाता हो, लेकिन इनमें भी केमिकल और प्रिजर्वेटिव हो सकते हैं। इसलिए लेबल ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
परफ्यूम की जगह क्या करें?
डॉ. नेहा के अनुसार बच्चों को खुशबूदार बनाने के लिए परफ्यूम की जरूरत नहीं है।
रोजाना बेबी-फ्रेंडली साबुन और साफ पानी से नहलाना काफी है।
नहाने के बाद हल्का मॉइश्चराइजर लगाएं।
बच्चों को हमेशा साफ और कॉटन के कपड़े पहनाएं।
हफ्ते में 2–3 बार नारियल या बादाम तेल से मालिश करें।
कपड़े धोने के लिए माइल्ड, केमिकल-फ्री डिटरजेंट का इस्तेमाल करें।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों की नेचुरल फ्रेशनेस ही सबसे बेहतर खुशबू है। कृत्रिम परफ्यूम से बचकर पेरेंट्स अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं।
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