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Home » पाकिस्तान बनाने वाले जिन्ना के पिता पुंजलाल थे हिन्दू, जाती से बहिष्कार के बाद बन गए थे मुस्लिम
देश

पाकिस्तान बनाने वाले जिन्ना के पिता पुंजलाल थे हिन्दू, जाती से बहिष्कार के बाद बन गए थे मुस्लिम

September 4, 2020No Comments4 Mins Read
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पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के पिता हिंदू परिवार में पैदा हुए थे. एक नाराजगी के चलते उन्होंने अपना धर्म बदल लिया. वो मुस्लिम बन गए. ताजिंदगी न केवल इसी धर्म के साथ रहे बल्कि उनके बच्चों ने इसी धर्म का पालन किया. बाद में तो मोहम्मद अली जिन्ना ने lतो धर्म के आधार पर पाकिस्तान ही बनवा डाला.

जिन्ना का परिवार मुख्य तौर पर गुजरात के काठियावाड़ का रहने वाला था. गांधीजी और जिन्ना दोनों की जड़ें इसी जगह से ताल्लुक रखती हैं. जिन्ना के दादा का नाम प्रेमजीभाई मेघजी ठक्कर था. वो हिंदू थे. वो काठियावाड़ के गांव पनेली के रहने वाले थे.

प्रेमजीभाई ने मछली के कारोबार से बहुत पैसा कमाया. वो ऐसे व्यापारी थे, जिनका कारोबार विदेशों में भी था. लेकिन वो जिस लोहना जाति से ताल्लुक रखते थे, उसके लोगों को उनका ये बिजनेस नापसंद था. दरअसल लोहना कट्टर शाकाहारी थे. धार्मिक तौर पर मांसाहार से सख्त परहेज करते थे. इसीलिए उन्हें जिन्ना के पिता का ये व्यावसाय कतई रास नहीं आता था.

2653मछली के कारोबार के कारण जाति से बाहर किए गए
लिहाजा जब प्रेमजी भाई ने मछली का कारोबार शुरू किया। वो इससे पैसा कमाने लगे तो उनके ही जाति से इसका विरोध होना शुरू हो गया. उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने ये व्यापार बंद नहीं किया तो उन्हें जाति से बाहर कर दिया जाएगा. फिर वो स्थिति आई कि उन्हें वाकई जाति से बहिष्कृत कर दिया गया

प्रेमजी ने इसके बाद भी बिजनेस जारी रखने के साथ जाति समुदाय में वापस लौटने की कोशिश की. समुदाय के लोगों को समझाया बुझाया. बात नहीं बनी. उनका बहिष्कार जारी रहा. अकबर एस अहमद की किताब जिन्ना, “पाकिस्तान एंड इस्लामिक आइडेंटीटी” में विस्तार से उनकी जड़ों की जानकारी दी गई है.

जिन्ना के बाबा गुजरात में लोहना जाति से थे, जहां मांसाहार पर पूरी तरह पाबंदी है लेकिन उनके पिता मछली का बड़ा कारोबार करते थे, लिहाजा उन्हें जाति से बहिष्कृत कर दिया गया.

जिन्ना के पिता ये अपमानजनक लगा औऱ धर्म बदल डाला
इस बहिष्कार के बाद भी प्रेमजी तो लगातार हिंदू बने रहे लेकिन उनके बेटे पुंजालाल ठक्कर को पिता और परिवार का बहिष्कार इतना अपमानजनक लगा कि उन्होंने गुस्से में पत्नी के साथ अपने चारों बेटों का धर्म बदल लिया. वो मुस्लिम बन गए.

हालांकि प्रेमजी के बाकी बेटे हिंदू धर्म में ही रहे. इसके बाद जिन्ना के पिता पुंजालाल के रास्ते अपने भाइयों और रिश्तेदारों तक से अलग हो गए. वो काठियावाड़ से कराची चले गए. वहां उनका बिजनेस और फला-वो इतने समृद्ध व्यापारी बन गए कि कंपनी का आफिस लंदन तक में खोला. कहा जाता है कि जिन्ना के बहुत से रिश्तेदार अब भी हिंदू हैं और गुजरात में रहते हैं.

फिर जिन्ना और भाई-बहनों का मुस्लिम नामकरण हुआ
जिन्ना की मातृभाषा गुजराती थी, बाद में उन्होंने कच्छी, सिन्घी और अंग्रेजी भाषा सीखी. काठियावाड़ से मुस्लिम बहुल सिन्ध में बसने के बाद जिन्ना और उनके भाई बहनों का मुस्लिम नामकरण हुआ. जिन्ना की तालीम अलग-अलग स्कूलों में हुई थी.

शुरू-शुरू में वे कराची के सिन्ध मदरसा-ऊल-इस्लाम में पढ़े. कुछ समय के लिए गोकुलदास तेज प्राथमिक विद्यालय, बम्बई में भी पढ़े, फिर क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल कराची चले गए. अन्ततोगत्वा उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ही मैट्रिक पास किया.

जिन्ना की पहली शादी ज्यादा नहीं चली
मैट्रिक पास करने के तुरन्त बाद ग्राह्म शिपिंग एण्ड ट्रेडिंग कम्पनी में उन्हें अप्रेंटिस के रूप में काम करने के लिए बुलावा आया. इंग्लैंड जाने से पहले उन्होंने मां के कहने पर शादी भी कर ली लेकिन वह शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चली. उनके इंग्लैंड जाने के बाद मां चल बसीं.

फिर इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई की
इंग्लैंड में उन्होंने कानून की पढ़ाई के लिए अप्रैंटिस छोड़ दी. उन्नीस साल की छोटी उम्र में वे वकील बन गए. इसके साथ सियासत में भी उनकी रुचि पैदा हुई. वे दादाभाई नौरोजी और फिरोजशाह मेहता के प्रशंसक बन गए. ब्रिटिश संसद में दादाभाई नौरोजी के प्रवेश के लिए उन्होंने छात्रों के साथ प्रचार भी किया. तब तक उन्होंने हिंदुस्तानियों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ संवैधानिक नजरिया अपना लिया था.

शुरू में धार्मिक पहचान से परहेज करते थे जिन्ना
जिन्ना के माता-पिता ने बच्चों की परवरिश खुले धार्मिक माहौल में की. जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों का प्रभाव था. इसलिए जिन्ना शुरुआत में धार्मिक तौर पर काफी ओपन और उदारवादी थे. वो लंबे समय तक लंदन में रहे.

शुरू में जिन्ना को मुस्लिम बताए जाने से परहेज था
मुस्लिम लीग में आने से पहले उनके जीने का अंदाज मुस्लिम धर्म से एकदम अलग था. शुरुआती दौर में वो खुद की पहचान मुस्लिम बताए जाने से भी परहेज करते थे. लेकिन सियासत उन्हें न केवल उन्हें उस मुस्लिम लीग की ओर ले गई, जिसके एक जमाने में वो खुद कट्टर आलोचक थे. बाद में वो धार्मिक आधार पर ही पाकिस्तान के ऐसे पैरोकार बने कि देश के दो टुकड़े ही करा डाले.

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