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New Delhi : वन्यजीव संरक्षण, बचाव और पुनर्वास के क्षेत्र में काम कर रहे वनतारा को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा के खिलाफ दायर एक नई याचिका को खारिज करते हुए साफ कहा कि जिन आरोपों को दोबारा उठाने की कोशिश की जा रही है, उनकी जांच पहले ही विशेष जांच दल (SIT) कर चुका है और इस मामले पर अदालत अपना फैसला भी दे चुकी है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिन मुद्दों की विस्तृत जांच हो चुकी है और जिन पर अदालत पहले विचार कर चुकी है, उन्हें बार-बार दोबारा खोलना उचित नहीं है। कोर्ट ने वनतारा के खिलाफ जांच, जब्ती और अभियोजन की मांग को भी अस्वीकार कर दिया।
SIT जांच पर कोर्ट ने जताया भरोसा
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि SIT ने मामले की गहराई से जांच की थी और अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी। ऐसे में पहले से तय और जांचे गए मामलों को दोबारा उठाने का कोई औचित्य नहीं बनता। कोर्ट के इस रुख को वनतारा के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
विदेशी देशों से लाए गए जानवरों के ट्रांसफर को बताया वैध
याचिका में विभिन्न देशों से वनतारा लाए गए जानवरों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), वेनेजुएला, ब्राजील, चेक रिपब्लिक, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों से लाए गए जानवरों का ट्रांसफर पूरी तरह वैध प्रक्रिया के तहत किया गया था। अदालत ने कहा कि सभी ट्रांसफर जरूरी दस्तावेजों, CITES परमिट और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority) की मंजूरी के आधार पर किए गए थे। कोर्ट ने इन्हें गैर-व्यावसायिक और जू-टू-जू ट्रांसफर की श्रेणी में माना।
जामनगर केंद्र की भूमिका को भी सराहा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में जामनगर स्थित वनतारा केंद्र के संरक्षण कार्यों का भी उल्लेख किया। अदालत ने विशेष रूप से लुप्तप्राय मैकॉ पक्षियों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम की सराहना की। कोर्ट ने कहा कि जिन जानवरों को कानूनी प्रक्रिया के तहत लाकर सुरक्षित वातावरण और बेहतर देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है, उन्हें वहां से हटाना उनके हित में नहीं होगा। ऐसा करना पशु कल्याण के सिद्धांतों के विपरीत और क्रूरता की श्रेणी में आ सकता है।
वनतारा ने फैसले का किया स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वनतारा प्रबंधन ने संतोष जताया है। वनतारा के सीईओ विवान करणी ने कहा कि यह फैसला संस्था के संरक्षण कार्यों और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि वनतारा में मौजूद हर जानवर कानूनी प्रक्रिया के तहत यहां पहुंचा है और उसकी पूरी संवेदनशीलता के साथ देखभाल की जा रही है। उनके मुताबिक संरक्षण केवल एक परियोजना नहीं बल्कि हर जीव के प्रति निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।
संरक्षण के प्रयासों को मिला मजबूत समर्थन
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि किसी संस्था द्वारा कानून और निर्धारित नियमों का पालन करते हुए पशु संरक्षण का कार्य किया जा रहा है, तो बिना ठोस आधार के उस पर बार-बार सवाल नहीं उठाए जा सकते। फैसले के बाद वनतारा ने कहा है कि वह भविष्य में भी बचाव, पुनर्वास और संरक्षण के अपने मिशन को इसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाता रहेगा।
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