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Ranchi (Pawan Thakur) : रांची की सड़कों पर सब कुछ सामान्य दिखता है। महंगे गैजेट्स, हाई–प्रोफाइल पार्टियां, कॉलेज जाते छात्र, कॉफी कैफे में बैठी युवा पीढ़ी, वीकेंड पार्टियों की तस्वीरें और सोशल मीडिया पर दिखती चमकती जिंदगी। लेकिन इसी चमक के पीछे एक ऐसा अंधेरा पनप रहा था, जिसकी जड़ें हजारों किलोमीटर दूर यूरोप तक फैली थीं। रांची पुलिस ने 100 LSD पैच के साथ दो लड़कों को गिरफ्तार कर एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जो डार्क वेब और क्रिप्टो करेंसी के जरिए नीदरलैंड से ड्रग्स मंगवाकर राजधानी में खपा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों के नाम कुमार अभिषेक और अविनाश मिश्रा बताए गए हैं। जब्त LSD की बाजार में अनुमानित कीमत करीब आठ लाख रुपये बताये गये।
एक पार्सल, जिसने खोल दिया राज
बीते बुधवार दोपहर करीब 1:30 बजे एसएसपी राकेश रंजन के कानों में किसी ने हौले से फूंक मारी और बताया कि सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के हेसल स्थित ओझा मार्केट के पास एक पार्सल की डिलीवरी होने वाली है। यह पार्सल शहर के युवाओं के लिए “धीमा जहर” है। इतना सुनते हा एसएसपी राकेश रंजन का माथा ठनका। उन्होंने तुरंत सिटी एसपी पारस राणा के नेतृत्व में टीम बनाई। आगे का टास्क नशे का जानी दुश्मन माने जाने वाले पुलिस अधिकारी कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोय को सौंपा गया। टीम में ट्रेनी IPS अधिकारी साक्षी जमुआर को भी शामिल किया गा। गठित टीम बताये गये लोकेशन पर पहुंच गयी और घेराबंदी कर इंतजार करने लगी। कुछ देर बाद लाल कपड़ा पहने एक युवक आया, पार्सल लिया और आगे बढ़ा। पुलिस ने उसे वहीं दबोच लिया। जब डीएसपी प्रकाश सोय ने खुद उसकी तलाशी ली, तो पैंट की जेब से निकला “NEDERLAND INTERNATIONAL” वाला लिफाफा। लिफाफ पर निदरलैंड का नाम देखते ही डीएसपी प्रकाश सोय का माथा ठनका। उनके जहन में कौंधा… मामला साधारण नहीं है, नीदरलैंड का ड्रग्स अब रांची की गलियों तक पहुंच गया है। यह यहां के युवाओं के लिए बेहद खतरनाक है। इस रैकेट को ध्वस्त करना होगा। लिफाफा खुला तो अंदर 100 रंग-बिरंगे LSD पैच थे। छोटे-छोटे कागज के टुकड़े, जिनकी कीमत और असर दोनों भारी थे। रंगीन कागज के छोटे टुकड़ों में छिपा धीमा जहर, जो राजधानी के युवाओं तक पहुंचने वाला था। गिरफ्तार युवक कुमार अभिषेक था। पूछताछ में उसने अपने साथी अविनाश मिश्रा का नाम लिया।

कसौल से रांची तक का सफर, ‘रईशजादे’ निशाने पर
अविनाश मिश्रा को भी पुलिस ने उठा लिया। अविनाश ने पुलिस को बताया कि पिछले साल वह हिमाचल प्रदेश के कसौल घूमने गया था। वहीं उसकी मुलाकात एक इजराइली शख्स से हुई, जिसने उसे पहली बार LSD दिया। उस “अनुभव” ने उसके दिमाग में दो चीजें बो दीं। एक नशे की लत और दूसरी तेज कमाई का लालच। गोवा, मुंबई और दूसरे शहरों की पार्टियों में उसने यह ड्रग्स फिर लिया। धीरे-धीरे उसने समझा कि यह महंगा है, दुर्लभ है और मांग ज्यादा है। उसका माथा ठनका और मन में विचार आया कि अगर इसे रांची जैसे शहर में पहुंचाया जाए तो बड़ा मुनाफा हो सकता है। इसी सोच और लालच ने उसे डार्क वेब तक पहुंचाया। उसने उस विदेशी संपर्क से पूरी प्रक्रिया सीखी। ऑर्डर कैसे देना है, क्रिप्टो करेंसी से भुगतान कैसे करना है, पार्सल कैसे मंगवाना है ताकि शक न हो। कुछ ही महीनों में वह इस “डिजिटल अंडरवर्ल्ड” का खिलाड़ी बन गया और रांची में ‘रईशजादों’ तक सप्लाई शुरू कर दी।

कुमार अभिषेक करता था डिलीवरी
कुमार अभिषेक इस खेल में उसका साथी बना। उसकी भूमिका डिलीवरी की थी। पार्सल लेना और तय ग्राहकों तक पहुंचाना। पुलिस के मुताबिक इनके ग्राहक शहर के रईश परिवारों के युवा थे, जो पार्टी कल्चर का हिस्सा हैं और महंगे नशे का शौक रखते हैं। पिछले तीन-चार महीनों से यह धंधा चुपचाप चल रहा था। किसी को भनक तक नहीं थी कि डाक से आने वाला एक सामान्य सा पार्सल, दरअसल जहर लेकर आ रहा है।

दोनों सलाखं के पीछे
रांची पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब पुलिस इस बात का पता लगाने में जुट गयी है कि इनके ग्राहक कौन थे और नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं। पुलिस टीम में ट्रेनी आईपीएस साक्षी जमुआर, कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोए, सुखदेवनगर थानेदार सुनील कुशवाहा, कोतवाली थानेदार रवि कुमार सिंह, पंडरा ओपी प्रभारी फैज रव्वानी, एससी/एसटी थाना प्रभारी महेश मुंडा, एसआई बजरंग टोप्पो और शंकर टोप्पो की भूमिका अहम रही।
रांची पुलिस ने 100 LSD पैच के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया, जो नीदरलैंड से ड्रग्स मंगाकर राजधानी के हाईप्रोफाइल युवाओं तक सप्लाई कर रहे थे। हिमाचल के कसौल से शुरू हुआ यह ड्रग्स नेटवर्क डार्क वेब और क्रिप्टो पेमेंट के जरिए काम कर रहा था। सिटा एसपी पारस राणा क्या बता गये… देखें pic.twitter.com/pcIH7B2V1i
— News Samvad (@newssamvaad) February 26, 2026
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