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Pakur (Jaydev Kumar) : नगरपालिका आम निर्वाचन 2026 से पहले पाकुड़ के बाजार समिति में जब मतदान दल के पदाधिकारियों की ट्रेनिंग चल रही थी, तो वहां सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने की तैयारी हो रही थी। कई शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी अपने रोजमर्रा के काम से अलग इस नई जिम्मेदारी के लिए पहुंचे थे। किसी के चेहरे पर गंभीरता थी तो कोई नोट्स लेने में व्यस्त था। सभी जानते हैं कि मतदान के दिन उनकी एक छोटी सी चूक भी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है।
सीखने के साथ जिम्मेदारी का एहसास
प्रशिक्षण में मतदान की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया। मतदाताओं की पहचान कैसे करनी है, दस्तावेजों का सही संधारण कैसे होगा और मतदान समाप्ति के बाद क्या सावधानियां रखनी हैं, इन सब पर विस्तार से चर्चा हुई। मास्टर ट्रेनर बार-बार यही समझा रहे थे कि मतदान सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से जुड़ा काम है। आपात स्थिति में कैसे निर्णय लेना है, सामग्री की सुरक्षा कैसे रखनी है, इन बातों पर भी खास ध्यान दिया गया।
उपायुक्त का संदेश : भरोसे की जिम्मेदारी
जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त मनीष कुमार ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला है। उन्होंने कर्मियों को याद दिलाया कि मतदान केंद्र पर बैठा हर अधिकारी जनता के भरोसे का प्रतिनिधि होता है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी बूथ से शिकायत नहीं आनी चाहिए। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उनके शब्दों में सख्ती भी थी और भरोसा भी।
बूथ पर सिर्फ ड्यूटी नहीं, सेवा भी
प्रशिक्षण में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मतदान केंद्र पर आने वाला हर मतदाता सम्मान और सुविधा का हकदार है। पेयजल, शौचालय, रोशनी और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कई मतदान कर्मियों ने माना कि चुनाव ड्यूटी चुनौतीपूर्ण जरूर होती है, लेकिन यह एक गर्व का क्षण भी होता है। गांव और शहर के लोग जब वोट डालने आते हैं, तो उन्हें सुरक्षित और सहज माहौल देना ही असली जिम्मेदारी है।
लोकतंत्र की मजबूत कड़ी
प्रशिक्षण खत्म होने के बाद भी कई कर्मी आपस में चर्चा करते दिखे। कोई प्रक्रिया दोहरा रहा था, तो कोई अपनी शंका दूर कर रहा था। यह सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि आने वाले मतदान दिवस की गंभीर तैयारी थी। नगरपालिका चुनाव 2026 को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत लगा दी है। लेकिन असली परीक्षा मतदान के दिन होगी, जब ये प्रशिक्षित हाथ लोकतंत्र की डोर संभालेंगे।
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