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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ की सुबह सामान्य थी, लेकिन बाजार समिति का मैदान आज थोड़ा अलग था। गांवों से आए मुखिया, शिक्षक और अफसरों की भीड़ ने माहौल को जीवंत बना दिया था। मंच की सजावट और बच्चियों के मॉडल उम्मीदों से भरी तस्वीर पेश कर रहे थे। समग्र शिक्षा, पाकुड़ द्वारा आयोजित जिला स्तरीय मुखिया सम्मेलन 2025 सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि गांवों की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने का प्रयास था।
जब पंचायत की जिम्मेदारी मंच पर उभरी
सम्मेलन का शुभारंभ डीसी मनीष कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पुरती, जिला शिक्षा अधीक्षक नयन कुमार और जिला क्रीड़ा पदाधिकारी राहुल कुमार ने दीप जलाकर किया। मुखिया अपनी पंचायतों के स्कूलों की छोटी-बड़ी प्रगति को लेकर उत्साहित भी थे और चिंतित भी। एक मुखिया ने कहा, “बच्चे स्कूल से दूर हो जाते हैं। आज समझ आया कि हमें और मेहनत करनी होगी।”
डीसी की अपील, जो सीधे गांवों तक जाएगी
डीसी मनीष कुमार ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि ही शिक्षा सुधार की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उन्होंने साफ कहा कि स्कूल में नामांकन, उपस्थिति और आधारभूत ढांचे में सुधार तभी होगा जब पंचायत खुद आगे आए। उन्होंने “आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार” अभियान का जिक्र भी किया। यह अभियान 21 नवंबर से 15 दिसंबर तक चलेगा। डीसी ने कहा कि बच्चों के जाति, आय और आधार पत्र समय पर बनें ताकि कोई बच्चा योजना से वंचित न हो।
अंग्रेजी में प्रस्तुति देकर महिला मुखिया ने बनाई पहचान
सम्मेलन में एक पल ऐसा आया जिसने सभी का ध्यान खींच लिया। एक महिला मुखिया ने अपनी पंचायत में किए गए कामों की प्रस्तुति अंग्रेजी में दी। लोगों की तालियां और मुस्कान इस बात की गवाही थीं कि गांवों में नेतृत्व तेजी से बदल रहा है। डीसी ने भी उनकी सराहना की।
स्कूलों की स्थिति पर विस्तृत चर्चा
जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पुरती ने कहा कि मुखिया के सहयोग से पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाया जा सकता है। जिला शिक्षा अधीक्षक नयन कुमार ने निरीक्षण व्यवस्था, सीखने के परिणाम और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।
जब मंच से नीचे सुझावों की बारिश हुई
कई मुखियाओं ने पानी की कमी, अभिभावकों की अनदेखी और बच्चों की उपस्थिति जैसी चुनौतियों को सामने रखा। एक मुखिया ने कहा, “आज यहां आकर लगा कि हम सब मिलकर बदलाव ला सकते हैं।” इन बातचीतों ने सम्मेलन को और अर्थपूर्ण बना दिया।
बच्चियों के मॉडल ने उम्मीद दिखाई
एक कोने में बच्चियों द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट मॉडल सबका ध्यान खींच रहे थे। बच्चियां आत्मविश्वास के साथ अपने मॉडल समझा रही थीं।
डीसी और जनप्रतिनिधि रुककर उनकी मेहनत देख रहे थे। इन मॉडलों ने साफ बताया कि बच्चों में क्षमता की कोई कमी नहीं है।
सम्मेलन खत्म, लेकिन बदलाव की शुरुआत
कार्यक्रम के बाद भी लोग जाते-जाते रुककर बातें करते रहे। किसी ने गांव में बैठक बुलाने की योजना बनाई, किसी ने स्कूल की मरम्मत पर ध्यान देने की बात कही। लग रहा था कि यह सम्मेलन सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक नई सोच की शुरुआत बन गया है। पाकुड़ के गांवों में शिक्षा फिर से प्राथमिकता बन रही है। और यही इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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