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Pakur (Jayev Kumar) : सुबह की पहली धूप खेतों पर पड़ती है तो गुतु गलांग कल्याण ट्रस्ट की दीदियां काम में जुट चुकी होती हैं। हाथों में बीज और आंखों में भरोसा। यही भरोसा आज नई दिल्ली के मंच तक पहुंचा है, जहां पाकुड़ की महिला नेतृत्व वाली किसान उत्पादक कंपनी को कृषि और पोषण के क्षेत्र में राष्ट्रीय सम्मान मिला।
जब खेती बनी सम्मान की कहानी
यह सम्मान सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं है। यह उन महिलाओं की मेहनत का नतीजा है, जिन्होंने सीमित साधनों के बावजूद खेती को आजीविका और सम्मान दोनों बनाया। ट्रस्ट को एग्री मार्केट लायजन एवं फॉरवर्ड लिंकेज चैंपियन अवार्ड से नवाजा गया। यह सम्मान किसानों को बाजार से जोड़ने और टिकाऊ कृषि मूल्य श्रृंखला मजबूत करने के काम के लिए दिया गया।
खेत से बाजार तक सीधी राह
गुतु गलांग कल्याण ट्रस्ट ने खेती को परंपरा से आगे बढ़ाकर अवसर बनाया। जिंक युक्त गेहूं, कैल्शियम युक्त फिंगर मिलेट, जिंक युक्त धान और आयरन युक्त पर्ल मिलेट का उत्पादन अब सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहा। इन फसलों का संगठित विपणन हुआ और किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिला। हजारों परिवारों की आमदनी में इसका सीधा असर दिखा।
बच्चों की थाली में सेहत की उम्मीद
पीवीटीजी समुदाय के बच्चों के लिए ट्रस्ट की पहल एक नई उम्मीद लेकर आई। बायोफोर्टिफाइड न्यूट्री कुकीज़ के जरिए कुपोषण से लड़ने की यह कोशिश सिर्फ पोषण नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव है। मांएं बताती हैं कि अब बच्चों में ऊर्जा और नियमितता दिखने लगी है।
जब महिलाएं बनीं बदलाव की ताकत
यह एफपीसी पूरी तरह पीवीटीजी महिलाओं द्वारा संचालित है। जो महिलाएं कभी घर और खेत तक सीमित थीं, आज फैसले ले रही हैं, बाजार से बात कर रही हैं और दूसरे गांवों के लिए मिसाल बन रही हैं। खेती ने उन्हें आवाज दी और संगठन ने पहचान।
जिले का गौरव, राज्य की पहचान
उपायुक्त मनीष कुमार ने ट्रस्ट की दीदियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पाकुड़ की मेहनती महिलाओं की पहचान है। उन्होंने जेएसएलपीएस की टीम के योगदान को भी सराहा। यह सफलता बताती है कि सही मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयास से दूरदराज के गांव भी राष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकते हैं।
एक कहानी जो आगे बढ़ती रहेगी
गुतु गलांग कल्याण ट्रस्ट की यह यात्रा यहीं खत्म नहीं होती। खेतों में बोए गए बीज अब उम्मीद के पौधे बन चुके हैं। यह कहानी सिर्फ पुरस्कार की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है, जो महिलाओं ने खुद पर किया और पूरे जिले ने जिस पर गर्व किया।
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