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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ जिला मुख्यालय के निश्चिंतपुर गांव में स्थित गोपाल गौशाला में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं था। यह ऐसा अवसर बना, जहां समाज, प्रकृति और सेवा एक ही धागे में बंधते नजर आए। गौशाला परिसर में सुबह से ही अलग सा सुकून था। हर चेहरा यह बता रहा था कि यहां कुछ अच्छा करने की मंशा लेकर लोग जुटे हैं।
हर पौधे में छुपा भविष्य
कार्यक्रम की शुरुआत फलदार पौधों के रोपण से हुई। समाजसेवी लुत्फुल हक, गौशाला के अध्यक्ष किशोर खेमानी, दीनानाथ एलानी, निर्मल जैन, संतोष केजरीवाल, सुरेश जैन, विनोद जैन और पवन जैन ने मिलकर पौधे लगाए। यह सिर्फ हरियाली बढ़ाने की पहल नहीं थी, बल्कि आने वाले समय में गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की सोच भी इसमें शामिल थी। फलदार पौधे आगे चलकर छाया, फल और पर्यावरण संतुलन तीनों का सहारा बनेंगे।

गौ सेवा में दिखी आत्मीयता
पौधारोपण के बाद कार्यक्रम ने मानवीय रूप ले लिया। सभी अतिथियों ने गौशाला में मौजूद गायों की सेवा की। किसी ने चारा खिलाया, किसी ने पानी पिलाया, तो किसी ने प्यार से गायों को सहलाया। इन पलों में औपचारिकता कहीं नजर नहीं आई। यह दृश्य बता रहा था कि गौ सेवा केवल परंपरा नहीं, बल्कि संवेदना से जुड़ा कर्म है।
लुत्फुल हक की मौजूदगी बनी प्रेरणा
समाजसेवी लुत्फुल हक की भूमिका इस पूरे आयोजन में खास रही। वे सिर्फ मंच साझा करने नहीं आए, बल्कि हर गतिविधि में सक्रिय रूप से शामिल रहे। पौधा लगाते समय हो या गौ सेवा के दौरान, उनकी सहजता और अपनापन साफ झलक रहा था। स्थानीय लोगों का कहना था कि लुत्फुल हक उन समाजसेवियों में हैं जो दिखावे से दूर रहकर चुपचाप काम करना पसंद करते हैं।

शब्दों से ज्यादा काम पर भरोसा
लुत्फुल हक ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि गौ सेवा और पर्यावरण संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने गोपाल गौशाला के प्रयासों की सराहना करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उनका कहना था कि जब तक समाज खुद आगे नहीं आएगा, तब तक स्थायी बदलाव संभव नहीं है। उनके शब्दों में सादगी थी, लेकिन संदेश गहरा था।
गौशाला से जुड़ी उम्मीदें
गौशाला के अध्यक्ष किशोर खेमानी ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम न केवल परिसर को हरा-भरा बनाते हैं, बल्कि लोगों को गौ सेवा से जोड़ने का भी काम करते हैं। उन्होंने कहा कि समाजसेवियों और स्थानीय लोगों के सहयोग से गौशाला लगातार आगे बढ़ रही है।
छोटी पहल, बड़ा संदेश
निश्चिंतपुर की गोपाल गौशाला में हुआ यह आयोजन भले ही छोटा दिखे, लेकिन इसका असर गहरा है। यहां लगाया गया हर पौधा और की गई हर सेवा यह याद दिलाती है कि इंसानियत अभी जिंदा है। जब समाज के लोग बिना किसी स्वार्थ के सेवा और प्रकृति के लिए साथ आते हैं, तभी सच्चे बदलाव की नींव पड़ती है।
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