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Home » कहावतों की महक से महका डीपीएस पाकुड़, बच्चों ने दिखाया भाषाओं का अनोखा संगम
झारखंड

कहावतों की महक से महका डीपीएस पाकुड़, बच्चों ने दिखाया भाषाओं का अनोखा संगम

December 8, 2025No Comments2 Mins Read
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डीपीएस
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अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

Pakur (Jaydev Kumar) : डीपीएस पाकुड़ में चल रहे भाषा उत्सव 2025 का चौथा दिन बच्चों के लिए बेहद रोचक रहा। इस दिन का विषय था भारतीय कहावतें और उनमें दिखने वाली समान भावनाएं। विभिन्न कक्षाओं के छात्रों ने भारत की अलग-अलग भाषाओं की कहावतें सीखी, समझीं और मंच पर सुनाईं।

कई भाषाओं में एक जैसा संदेश

कार्यक्रम में लगभग 11 भारतीय भाषाओं… हिंदी, उर्दू, असमी, पंजाबी, तमिल, संस्कृत, बंगाली, ओड़िया, गुजराती, सिंधी और मराठी की कहावतें शामिल की गईं। बच्चों ने बताया कि भाषा चाहे कोई भी हो, सीख एक जैसी होती है। जैसे हिंदी की कहावत एकता में बल है को उन्होंने इंग्लिश, तमिल और अन्य भाषाओं में भी समझाया।

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कहावतों के जरिए सरल सीख

कई विद्यार्थियों ने मेहनत, नैतिकता और जीवन व्यवहार पर आधारित कहावतें पेश कीं। उदाहरण के तौर पर कड़ी मेहनत का फल मीठा होता है को मराठी और गुजराती में भी समझाया गया। इससे बच्चों ने महसूस किया कि हर भाषा में जीवन के अनुभवों को बहुत ही आसान तरीके से पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचाया जाता है।

निदेशक ने समझाया भाषाओं का सांस्कृतिक संबंध

विद्यालय के निदेशक अरुणेंद्र कुमार ने कहा कि कहावतें किसी भी भाषा की आत्मा होती हैं। उन्होंने अधजल गगरी छलकत जाए, आप बुरे तो जग बुरा जैसी कई कहावतों के उदाहरण देकर बच्चों को उनका वास्तविक अर्थ समझाया। उन्होंने यह भी बताया कि कहावतें सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि अनुभव का सार होती हैं।

प्रधानाचार्य ने बताया कहावतों का महत्व

प्रधानाचार्य जे. के. शर्मा ने कहा कि अलग-अलग भाषाओं की कहावतों में भाव एक ही रहता है। उनके अनुसार कहावतें जीवन की चुनौतियों को समझने, सही निर्णय लेने और मुश्किल समय में मार्गदर्शन देने का काम करती हैं। उन्होंने बच्चों को रोजमर्रा के जीवन में इनका उपयोग करने की सलाह दी।

इसे भी पढ़ें : पाकुड़ का यह बीयर गोदाम सील… जानें क्यों

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