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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के डायट भवन में जब मास्टर सोबरान मांझी पुस्तकालय के पाठक एक साथ जुटे, तो माहौल सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम का नहीं था। वहां किताबों की खुशबू, मेहनत की कहानियां और आगे बढ़ने के सपने एक साथ महसूस हो रहे थे। वर्ष 2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पाठकों के सम्मान समारोह ने उन युवाओं को मंच दिया, जिनकी दुनिया अक्सर शांत कोनों में पढ़ी गई किताबों के बीच आकार लेती है।
दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत, उम्मीदों की लौ जली
कार्यक्रम की शुरुआत डीसी मनीष कुमार और जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पुरती ने दीप प्रज्वलित कर की। दीपक की लौ जैसे यह संदेश दे रही थी कि ज्ञान की रोशनी कभी बुझती नहीं। समारोह में मौजूद युवाओं के चेहरों पर उत्साह साफ दिख रहा था, क्योंकि आज उनकी मेहनत को सार्वजनिक पहचान मिल रही थी।
पुस्तकालय केवल जगह नहीं, जीवन की दिशा है
उपायुक्त मनीष कुमार ने नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं होता। यह वह जगह है जहां अनुशासन जन्म लेता है और लक्ष्य धीरे धीरे स्पष्ट होते हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में बिताया गया समय जीवन के सबसे कीमती वर्षों में शामिल होता है, क्योंकि यहीं से सही सोच और सही दिशा तय होती है।

खामोशी में पलती मेहनत की कहानी
मास्टर सोबरान मांझी पुस्तकालय वर्षों से उन युवाओं का साथी रहा है, जो बड़े सपनों के साथ छोटे शहरों से निकलते हैं। यहां सुबह से शाम तक पढ़ाई में डूबे युवा एक दूसरे को देखकर सीखते हैं। कोई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है, तो कोई अपने विषय में गहराई से समझ बनाता है। यही खामोशी आगे चलकर सफलता की आवाज बनती है।
दो पीढ़ियों को आगे बढ़ते देखने वाला केंद्र
उपायुक्त ने पुस्तकालय की सराहना करते हुए कहा कि यह स्थान दो पीढ़ियों को आगे बढ़ते देखने का साक्षी रहा है। कई पाठक आज अलग अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं, और नई पीढ़ी उन्हीं की राह पर चलने का सपना देख रही है। यह निरंतरता ही इस पुस्तकालय की सबसे बड़ी ताकत है।
सम्मान ने बढ़ाया आत्मविश्वास
सम्मान समारोह के दौरान उत्कृष्ट पाठकों को प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो दिए गए। मंच पर बुलाए गए युवाओं की आंखों में गर्व और आत्मविश्वास झलक रहा था। सम्मानित पाठकों ने बताया कि नियमित पढ़ाई, अनुशासन और पुस्तकालय का वातावरण उनकी सफलता की नींव बना।
पुस्तकों से समाज तक का सफर
यह आयोजन केवल सम्मान तक सीमित नहीं रहा। इसने यह भी दिखाया कि जब समाज पठन संस्कृति को महत्व देता है, तो उसका असर दूर तक जाता है। मास्टर सोबरान मांझी पुस्तकालय आज सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि उन अनगिनत कहानियों का केंद्र है, जहां किताबों से शुरू होकर जीवन बदलने तक का सफर तय होता है।
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