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Home » सोलर से लेकर पम्प-हाइड्रो तक : झारखंड बना सकता है 66 गीगावाट ग्रीन एनर्जी
झारखंड

सोलर से लेकर पम्प-हाइड्रो तक : झारखंड बना सकता है 66 गीगावाट ग्रीन एनर्जी

August 20, 2025No Comments4 Mins Read
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झारखंड
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Ranchi : झारखंड अब हरित विकास और अक्षय ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। राज्य सरकार की टास्क फोर्स–सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन और सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) की ओर से राजधानी रांची में एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट का नाम है – ‘पावरिंग प्रोग्रेस : अनलॉकिंग रिन्यूएबल एनर्जी एंड स्टोरेज पोटेंशियल असेसमेंट इन झारखंड’। यह राज्य का पहला हाई-रेज़ोल्यूशन स्टडी है, जिसमें सभी 24 जिलों और प्रखंडों में अक्षय ऊर्जा की क्षमता का आकलन किया गया है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • झारखंड में लगभग 66 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और स्टोरेज क्षमता की संभावना है।
  • इसमें से 46 गीगावाट अक्षय ऊर्जा तकनीकों से और 20 गीगावाट पम्प-हाइड्रो एनर्जी स्टोरेज से प्राप्त हो सकती है।
  • सोलर एनर्जी में सबसे ज्यादा क्षमता है – करीब 41 गीगावाट। इसमें यूटिलिटी-स्केल, रूफटॉप, फ्लोटिंग, एग्रीवोल्टैक्स और कॉन्सन्ट्रेटेड सोलर पावर (CSP) शामिल हैं।
  • वर्तमान में झारखंड की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता सिर्फ 434 मेगावॉट (7.2%) है।
  • रिपोर्ट में गिरिडीह, रांची, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, हज़ारीबाग, पलामू और चतरा को उच्च क्षमता वाले जिले बताया गया है।
  • इसके अलावा 4.1 गीगावाट हाइड्रो पावर, 715 मेगावॉट विंड एनर्जी और लगभग 1 गीगावाट बायोएनर्जी की संभावना भी सामने आई है।

अधिकारियों के विचार

रिपोर्ट जारी करते हुए कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने विचार रखे –

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  • अबूबकर सिद्दीख पी., आईएएस, सचिव (वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग) ने कहा… “यह रिपोर्ट झारखंड में एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा तय करने में सहायक होगी। हमारे प्राकृतिक संसाधन राज्य को ग्रीन इकोनॉमी की ओर ले जाने में सक्षम हैं।”
  • अरवा राजकमल, आईएएस, सचिव (उद्योग विभाग) ने कहा… “अक्षय ऊर्जा के दोहन के लिए मजबूत विनिर्माण और तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र की जरूरत है। एमएसएमई और औद्योगिक इकाइयां इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं।”
  • मुकेश कुमार, आईएएस, सचिव (योजना एवं विकास विभाग)ने कहा… “झारखंड को पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों की अक्षय ऊर्जा सफलता की कहानियों से सीख लेनी चाहिए। हमारे अप्रयुक्त प्राकृतिक संसाधन सतत आर्थिक विकास में सहायक होंगे।”
  • ए.के. रस्तोगी, आईएफएस (रिटायर्ड), अध्यक्ष – टास्क फोर्सने कहा… “क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन झारखंड को भविष्य-उन्मुख अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा। यह ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।”
  • रवि रंजन, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैंपा) ने कहा… “जलवायु परिवर्तन हमें सतत विकास की दिशा में बढ़ने की चेतावनी दे रहा है। अक्षय ऊर्जा से कार्बन फुटप्रिंट कम होगा और व्यापक सामाजिक हितों की पूर्ति होगी।”
  • रमापति कुमार, सीईओ (सीड) ने कहा… “झारखंड अब ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन इकोनॉमी की दिशा में उदाहरण बनने के लिए तैयार है। सीड सरकार के साथ मिलकर रोडमैप बनाने में निरंतर सहयोग करता रहेगा।”

तकनीकी सत्र और चर्चाएं

कार्यक्रम में ‘एनर्जी ट्रांजिशन पाथवे’ पर एक तकनीकी सत्र भी आयोजित हुआ। इसमें डॉ. मनीष राम (सीड), विभूति गर्ग (आईफा), सचिन सिंह (टेरी), और मनोज कुमार कर्माली (झारखंड ऊर्जा संचरण निगम) जैसे विशेषज्ञों ने भाग लिया।

उन्होंने सुझाव दिया कि –

  • निवेश और वित्तीय माहौल को बेहतर बनाया जाए।
  • अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया जाए।
  • टेक्नो-फिज़िबिलिटी स्टडीज़ और पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम हो।
  • सामाजिक रूप से लाभकारी ऊर्जा योजनाओं को प्राथमिकता मिले।
  • सभी हितधारकों को एक साझा मंच पर लाया जाए।

जस्ट ट्रांजिशन फ्रेमवर्क

कार्यक्रम के दौरान झारखंड सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन फ्रेमवर्क पर भी चर्चा हुई। इसे हाल ही में 24 जुलाई को मुख्यमंत्री ने औपचारिक रूप से लॉन्च किया था। इस चर्चा में पंचायत प्रतिनिधि, ट्रेड यूनियन, श्रमिक, आजीविका संगठनों और कम्युनिटी लीडर्स ने भाग लिया। उद्देश्य है – झारखंड में हरित ऊर्जा ट्रांजिशन को आगे बढ़ाना ताकि “कोई भी पीछे न छूटे।”

साफ है कि यह रिपोर्ट झारखंड को अक्षय ऊर्जा और हरित विकास का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

इसे भी पढ़ें : दरिंदा चाचा लूटता रहा सगी भतीजी की आबरू, कैसे खुला राज… जानें

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