अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Pakur (Jaydev Kumar) : सुबह का वक्त था। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हलचल कुछ अलग थी। डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, अधिकारी और आम लोग एक साथ जुटे थे। मौका था विश्व स्वास्थ्य दिवस का, लेकिन यह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। यहां सेहत को लेकर सोच बदलने की कोशिश दिख रही थी। झालसा रांची के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद ने मिलकर इसे जमीन पर उतारा।
जब कानून और स्वास्थ्य साथ आए
अक्सर स्वास्थ्य और कानून अलग-अलग नजर आते हैं, लेकिन इस कार्यक्रम में दोनों एक मंच पर दिखे। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष दिवाकर पांडे के निर्देश पर आयोजित इस पहल में यह संदेश साफ था कि स्वस्थ समाज ही मजबूत समाज होता है। कार्यक्रम में सचिव रूपा वंदना किरो, सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र कुमार मिश्रा, डॉ. एसके झा, डॉ. केके सिंह और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अमरेंद्र चौधरी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही एएनएम, सहिया और पैरा लीगल वॉलिंटियर्स की सक्रिय भागीदारी ने इसे जन-कार्यक्रम बना दिया।

बदलती जिंदगी, बढ़ती बीमारियां
कार्यक्रम के दौरान जब सिविल सर्जन डॉ. मिश्रा बोले, तो उनकी बातों में आज के समय की सच्चाई झलक रही थी। उन्होंने कहा कि प्रदूषण, भागदौड़ और गलत खान-पान ने लोगों की सेहत पर असर डाला है। आज लोग जल्दी के चक्कर में जंक फूड की तरफ बढ़ रहे हैं और धीरे-धीरे बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि दिनचर्या में योग और संतुलित आहार को शामिल करें।
“स्वास्थ्य ही असली संपत्ति है”
सचिव रूपा वंदना किरो ने अपनी बात में एक सीधी लेकिन गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि अगर शरीर और मन स्वस्थ नहीं है, तो जीवन की खुशियां अधूरी रह जाती हैं। उन्होंने लोगों को समझाया कि सेहत कोई एक दिन की बात नहीं है। यह रोज की आदतों से बनती है। छोटी-छोटी सावधानियां, जैसे सही भोजन, नियमित जांच और साफ-सफाई, बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं।
सम्मान, सहयोग और संवेदना
कार्यक्रम का एक भावुक पहलू भी सामने आया। यहां सिर्फ बातें नहीं हुईं, बल्कि जरूरतमंदों तक मदद भी पहुंचाई गई। टीबी मरीजों को पोषण पैकेट दिए गए, ताकि उनका इलाज बेहतर तरीके से चल सके। यह सिर्फ मदद नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी था कि समाज उनके साथ खड़ा है। वहीं नवदंपत्तियों को “नई पहल किट” दी गई। यह एक तरह से स्वस्थ और जागरूक परिवार की शुरुआत का प्रतीक बना।
जमीनी स्तर पर जागरूकता की कोशिश
कार्यक्रम में मौजूद सहिया, एएनएम और स्वास्थ्यकर्मी इस पहल की असली ताकत दिखे। यही लोग गांव-गांव और मोहल्लों में जाकर लोगों को समझाते हैं। इस तरह के कार्यक्रम उन्हें भी नई ऊर्जा देते हैं और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने का रास्ता मजबूत करते हैं।
इसे भी पढ़ें : SP निधि ने कसा शिकंजा, 10 महीने में 3386 वारंट का हो गया निपटारा



