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Ranchi : “न्याय सिर्फ फैसला सुनाने का नाम नहीं है, बल्कि पीड़ित को समय पर राहत देना ही असली न्याय है।” यह कहना है जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायायुक्त सह डालसा रांची के अध्यक्ष अनिल कुमार मिश्रा-1 का। राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर की जा रही तैयारियों के बीच उनकी यह बात लोक अदालत की मूल भावना को बखूबी दर्शाती है। 14 मार्च को रांची सिविल कोर्ट में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर अनिल कुमार मिश्रा-1 स्वयं लगातार बैठकों और तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। उनके लिए यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में बदलाव लाने का माध्यम है।
“हर वादकारी तक पहुंचे न्याय”
बैठक के दौरान अनिल कुमार मिश्रा-1 ने अधिकारियों और प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिया, “एक भी ऐसा वादकारी नहीं छूटना चाहिए, जिसे लोक अदालत का लाभ मिल सकता हो। बैंक और बीमा से जुड़े मामलों की सूची बनाएं, नोटिस भेजें और जरूरत पड़े तो फोन कर लोगों को जानकारी दें।” उनका मानना है कि जब तक सही सूचना लोगों तक नहीं पहुंचेगी, तब तक लोक अदालत का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।
फाइलों के पीछे छुपी होती हैं कहानियां
अनिल कुमार मिश्रा-1 अक्सर कहते हैं कि हर फाइल के पीछे किसी न किसी व्यक्ति का दर्द, संघर्ष और उम्मीद छुपी होती है। कोई मुआवजे का इंतजार कर रहा होता है, तो कोई पारिवारिक विवाद से परेशान होता है। वे कहते हैं, “हम जब किसी केस को देखते हैं, तो सिर्फ कागज नहीं देखते। हमें यह भी समझना होता है कि सामने बैठा व्यक्ति किन हालात से गुजर रहा है।”
समझौता नहीं, समाधान का मंच
लोक अदालत को लेकर आम लोगों में अक्सर यह धारणा रहती है कि यहां केवल समझौता कराया जाता है। लेकिन अनिल कुमार मिश्रा-1 इसे अलग नजरिए से देखते हैं। उनका कहना है, “यहां किसी पर दबाव नहीं डाला जाता। दोनों पक्षों की सहमति से ऐसा समाधान निकाला जाता है, जिससे भविष्य में विवाद दोबारा न हो।” उनके अनुसार, लोक अदालत का उद्देश्य विवाद को खत्म करना है, न कि उसे दबाना।

जागरूकता को मानते हैं सबसे बड़ी ताकत
अनिल कुमार मिश्रा-1 बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। इसी कारण वे पोस्टर, बैनर और प्रचार के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने पर बल देते हैं। वे कहते हैं, “अगर लोगों को पता ही नहीं होगा कि उनके लिए यह सुविधा मौजूद है, तो वे इसका लाभ कैसे लेंगे?” उनकी पहल पर जिले भर में प्रचार अभियान तेज किया गया है।
टीमवर्क से मिलती है सफलता
लोक अदालत की सफलता को वे किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं मानते। न्यायिक अधिकारी, पुलिस, पीएलवी, स्वयंसेवक, बैंक और बीमा कंपनियां सबकी भूमिका को वे बराबर महत्व देते हैं। न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 कहते हैं, “जब पूरी टीम एक लक्ष्य के साथ काम करती है, तभी हजारों मामलों का निपटारा संभव हो पाता है।”
समय और सम्मान दोनों जरूरी
उनकी कार्यशैली का मूल मंत्र है… समय और सम्मान। वे मानते हैं कि वादकारियों को केवल जल्दी न्याय ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक व्यवहार भी मिलना चाहिए। वे कहते हैं, “कोर्ट में आने वाला हर व्यक्ति सम्मान का हकदार है, चाहे वह गरीब हो या अमीर।”
14 मार्च : उम्मीदों की तारीख
14 मार्च को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर अनिल कुमार मिश्रा-1 काफी आशावान हैं। उनका लक्ष्य है कि इस दिन अधिक से अधिक मामलों का समाधान हो और लोग संतोष के साथ अपने घर लौटें। उनका कहना है, “अगर एक भी व्यक्ति यहां से मुस्कुराकर लौटता है, तो हमारी मेहनत सफल हो जाती है।”
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