अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : कमरे के भीतर अगरबत्ती और धूप का गाढ़ा धुआं तैर रहा है। बैकग्राउंड में धीमे सुर में ‘जय माता दी’ का संकीर्तन चल रहा है। कमरे के ठीक बीचों-बीच एक तख्त बिछा है, जिस पर कोई गद्दा या चादर नहीं, बल्कि चमकती हुई 12 किलो लोहे की नुकीली कीलें गड़ी हैं। इसी खौफनाक सेज पर आंखें मूंदे लेटी हैं रूपा देवी। उनके पेट पर पीतल का भारी कलश टिका है, जिसमें अखंड ज्योत और पूजा की सामग्री सजी है। रामगढ़ जिले के बरकाकाना क्षेत्र में पोचरा के झोपड़ी टोला का यह मंजर जिसने भी देखा, उसके रोंगटे खड़े हो रहे हैं। नवरात्र के पावन दिनों में मां दुर्गा की आराधना के कई रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन रूपा देवी की यह साधना भक्ति अनोखी नजर आ रही है।
दर्द को भुलाकर मां के नौ रूपों में ध्यान मग्न
तख्त पर जरा सी भी हलचल हो तो कीलें शरीर में धंस सकती हैं, लेकिन रूपा देवी के चेहरे पर शिकन तक नहीं दिखती। उनके पति राजेश राम पास ही खड़े होकर पूजा-अर्चना की व्यवस्था संभाल रहे हैं। घर के लोग बताते हैं कि पहले दिन मां शैलपुत्री के आह्वान के साथ यह कठिन साधना शुरू हुई है, जो नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा तक अनवरत चलती है। नौ दिनों तक इसी एक मुद्रा में टिके रहना, बिना करवट बदले कीलों की चुभन सहना और ऊपर से पेट पर कलश का भारी वजन संभालना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। परिवार का कहना है कि यह सब केवल मां भगवती के प्रति अटूट विश्वास और संकल्प के बूते ही मुमकिन हो पा रहा है।
चौखट पर उमड़ रहे श्रद्धालु
जैसे-जैसे झोपड़ी टोला में इस अनोखी साधना की खबर आसपास के गांवों और कस्बों में फैल रही है, वैसे-वैसे रूपा देवी के घर के बाहर लोगों का तांता बढ़ता जा रहा है। सुबह से लेकर देर शाम तक महिलाएं, बुजुर्ग और नौजवान हाथ जोड़े इस अनोखी आस्था के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। लोग कमरे के दरवाजे पर सिर झुकाकर मन्नतें मांग रहे हैं और महिला के अदम्य साहस को प्रणाम कर रहे हैं। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में नवरात्र के कई कठिन व्रत देखे हैं, पर लोहे की कीलों की सेज पर नौ दिन गुजारने का ऐसा नजारा इलाके में पहली बार सामने आया है। हर किसी की जुबान पर बस रूपा देवी के इस हैरतअंगेज संकल्प की ही चर्चा है।
श्रद्धा के बीच सेहत की चिंता और डॉक्टरों की चेतावनी
जहां एक तरफ आस्था का यह सैलाब हिलोरे मार रहा है, वहीं दूसरी तरफ महिला की जान और सेहत को लेकर चिंताएं भी कम नहीं हैं। डॉक्टर साफ तौर पर आगाह कर रहे हैं कि इतने दिनों तक लगातार लोहे की नुकीली सतह पर लेटे रहने से त्वचा कटने, टिटनेस और गहरे इन्फेक्शन का भारी खतरा बना रहता है। पीठ के घाव या नसों पर लगातार दबाव से खून का दौरा भी प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि गांव के समझदार लोग और स्वास्थ्य कर्मी परिवार को लगातार सतर्क रहने और रूपा देवी की नब्ज पर नजर बनाए रखने की ताकीद कर रहे हैं। फिलहाल पूरा इलाका हाथ जोड़े बस यही मना रहा है कि यह नौ दिनी कठिन अनुष्ठान बिना किसी परेशानी के कुशलतापूर्वक संपन्न हो जाए।
इसे भी पढ़ें : सीएम हेमंत ने मां रूपी सोरेन के लिए निभाई रस्म, अर्पित किया भोजन


