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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : भुरकुंडा की ठंडी सुबह थी। कोयला खदानों के आसपास हल्की धुंध छाई हुई थी। काम पर जाने से पहले कई मजदूर रीवर साइड कार्यालय की ओर बढ़े थे। किसी के हाथ में पुरानी फाइल थी, तो कोई अपने साथियों से भविष्य की चिंता साझा कर रहा था। चेहरों पर थकान थी, लेकिन आंखों में अब भी उम्मीद की चमक नजर आ रही थी। यही मजदूर एनसीओइए सीटू की बैठक में पहुंचे थे। वजह साफ थी, 12 फरवरी की देशव्यापी हड़ताल और अपने हक की लड़ाई। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद वेदी पर पुष्प अर्पित कर और झंडोतोलन के साथ की गई।
कई क्षेत्रों के पदाधिकारी हुए शामिल
इस बैठक में बरका सयाल, अरगड्डा, हजारीबाग, रजरप्पा क्षेत्र, केंद्रीय कर्मशाला बरकाकाना और केंद्रीय अस्पताल नई सराय के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में एक अध्यक्षीय मंडल द्वारा प्रस्ताव पेश किया गया, जिसके बाद चर्चा शुरू हुई।
अतिथियों का स्वागत और प्रमुख नेताओं की मौजूदगी
कार्यक्रम में बरका सयाल एरिया सचिव रामनरेश सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। बैठक में ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन सीटू के जनरल सेक्रेटरी डीडी रामनंदन, एनसीओइए के जनरल सेक्रेटरी आरपी सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह और केंद्रीय उपाध्यक्ष पीडी सिंह उपस्थित रहे।
श्रम कानूनों पर आरपी सिंह का कड़ा बयान
एनसीओइए के जनरल सेक्रेटरी आरपी सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों को चार कोड में बदलकर मजदूरों के अधिकार कमजोर कर दिए हैं। इन कानूनों को इतना जटिल बना दिया गया है कि मजदूर संगठन ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए मजदूर संगठनों को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि कोयला मजदूरों की हालत 1972 से पहले जैसी होने जा रही है, जहां मजदूर निजी कंपनियों के अधीन हो जाएंगे।
जमीन के बदले नौकरी का मुद्दा
आरपी सिंह ने कहा कि पहले जमीन देने पर नौकरी और मुआवजा दोनों मिलता था, लेकिन अब सरकार जमीन तो ले रही है, नौकरी नहीं दे रही। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों का निपटारा करने की नई व्यवस्था मजदूरों के खिलाफ है।
हड़ताल को सफल बनाने की अपील
आरपी सिंह ने सभी मजदूरों से एकजुट होकर 12 फरवरी की हड़ताल को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह समय निर्णायक है और अगर अभी आवाज नहीं उठाई गई, तो आगे मुश्किलें बढ़ेंगी।
डीडी रामनंदन ने बताया हड़ताल जरूरी
डीडी रामनंदन ने कहा कि चार श्रम कोड मजदूरों के हित में नहीं हैं। इनका सीधा असर मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इन कानूनों के खिलाफ हड़ताल बेहद जरूरी है।
बैठक की अध्यक्षता और मौजूद लोग
बैठक की अध्यक्षता बासुदेव साव ने की। मौके पर संतोष यादव, सुशील कुमार, गोपाल यादव, संजय कुमार, किरण कुमार, बलभद्र दास, देवनाथ महली, वीरेंद्र सिंह, नेपाल विश्वकर्मा, सुभाष तिवारी, सुखसागर सिंह, विनोद कुमार, हीरा गोप, विकास कुमार, असीम धर, प्रकाश पटेल, सकलाल महतो, सुनील यादव, गणेश उरांव, साबिर अंसारी सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
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