अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : भुरकुंडा की सुबह उस दिन कुछ अलग थी। हवा में हल्की सी ठंडक थी, पेड़ों की पत्तियां जैसे खुद ही उत्सव का हिस्सा बन गई हों। गांव-शहर की सरहद मिट गई थी और हर गली, हर रास्ता एक ही दिशा में जा रहा था, सरना स्थल की ओर। मौका था सरहुल का, प्रकृति को धन्यवाद कहने का दिन।
जब हर घर से निकली एक कहानी
रीवर साइड, दुंदुआ, पटेलनगर, न्यू बैरेक… हर मोहल्ले से लोग निकले। कोई पारंपरिक सफेद धोती और गमछा में था, तो कोई रंग-बिरंगी साड़ी में। बच्चों की आंखों में चमक थी और बुजुर्गों के चेहरे पर संतोष। एक बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, “सरहुल सिर्फ पूजा नहीं है, ये हमारे जीने का तरीका है। पेड़-पौधे, नदी, मिट्टी… सबको धन्यवाद देने का दिन है।”

मांदर की थाप पर थिरकती नई पीढ़ी
जैसे ही मांदर की थाप गूंजी, माहौल बदल गया। युवक-युवतियां खुद को रोक नहीं पाए। कदम अपने आप ताल पकड़ते गए। डीजे की धुन भी थी, लेकिन मांदर की आवाज में जो अपनापन था, वही सबको खींच रहा था। एक युवती ने नाचते हुए कहा, “आज हम बस खुश हैं। ये हमारा त्योहार है, हमारी पहचान है।”
झांकी में दिखी संस्कृति की जीवंत तस्वीर
शोभायात्रा में निकली झांकियां सिर्फ सजावट नहीं थीं, वे एक कहानी कह रही थीं। कहीं जंगल और जल की पूजा, तो कहीं आदिवासी जीवन की झलक। लोग इन्हें देखते हुए रुक जाते, तस्वीरें लेते और फिर उसी उत्साह के साथ आगे बढ़ते।

रास्ते में सेवा, दिलों में अपनापन
जुलूस जहां-जहां से गुजरा, वहां लोगों ने सेवा का हाथ बढ़ाया। किसी ने शर्बत दिया, किसी ने चना-गुड़। गर्मी के बीच यह छोटा सा सहारा भी बहुत बड़ा लग रहा था। एक स्वयंसेवक ने कहा, “आज सेवा करने का भी दिन है। सब एक-दूसरे के अपने हैं।”
सम्मान और जिम्मेदारी का एहसास
कार्यक्रम से पहले अतिथियों का सम्मान हुआ, लेकिन असली सम्मान तो उस परंपरा का था, जिसे पीढ़ियां संभालती आई हैं। पाहन और समाज के बुजुर्गों की मौजूदगी ने पूरे आयोजन को एक गरिमा दी।

सुरक्षा के बीच भी अपनापन कायम
पुलिस की तैनाती हर जगह दिख रही थी, लेकिन माहौल में कहीं डर नहीं था। लोग बेफिक्र होकर नाच रहे थे, गा रहे थे। पुलिस भी मुस्कुराते हुए व्यवस्था संभालती नजर आई।
शोभायात्रा में लोगों की सेवा में जुटे रहे ये लोग
जुलूस से पूर्व केंद्रीय मिलन सरहुल पूजा समिति ने अतिथि बड़कागांव भाजपा विधायक रोशन लाल चौधरी, संजीव सिंह बाबला, अजय पासवान, गिरधारी गोप, चमन लाल, प्रेमनाथ साहू को बैच लगाकर और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में केंद्रीय पहान देवलाल मुंडा, बरतु उरांव पाहन, दर्शन गंझू, पात्रिक मिंज, रवि उरांव, संजय लिंडा, मिथिलेश टुड्डू, रितिका भोगता, अखिलेश टोप्पो, सामू मुंडा, जोहरन करमाली, संतोष उरांव, मिंटू मुंडा, बिनोद बेदिया, रेणुका खलखो, संतोष उरांव, सरिता टोप्पो, देवकुमार बेदिया, सुरेश रजवार, संजय टुड्डू, आशीष उरांव, राजेन्द्र मुंडा, रासेल तिग्गा, राजेन्द्र बेदिया, गोविंद बड़ाईक, अरुण उरांव, ललिता देवी, लक्की मुण्डा, प्रेमी सलोनी तिर्की, रूपन देवी, मनोज मुण्डा, रतन देवी, पिन्दु उरांव, मालती देवी, संगीता देवी सहित अन्य लोग जुटे हुए थे।

इसे भी पढ़ें : जब एक्सपर्ट खुद बने स्टूडेंट, डॉ जयंत ने जापान के दिग्गज से सीखा नया हुनर



