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Ranchi : किसी के लिए छात्रवृत्ति सिर्फ एक सरकारी योजना हो सकती है, लेकिन झारखंड के हजारों छात्रों के लिए यही उनके सपनों की डोर है। फीस भरने से लेकर किताबें खरीदने तक, सब कुछ इसी रकम पर टिका होता है। ऐसे में जब ई-कल्याण पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ियों के कारण पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (सत्र 2024-25) के आवेदन अटक गए, तो कई घरों में चिंता का माहौल बन गया। अब विभाग की ओर से आवेदन सुधार और डीएनओ वेरिफिकेशन की तारीख बढ़ा दी गई है। इस फैसले ने छात्रों और उनके परिवारों के चेहरों पर फिर से उम्मीद की चमक लौटा दी है।
“अगर छात्रवृत्ति नहीं मिली तो पढ़ाई छूट जाएगी”
गिरिडीह की रहने वाली बीए की एक छात्रा है। उनके पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। वह बताती है, “फॉर्म भर दिया था, लेकिन पोर्टल में गलती सुधारने का ऑप्शन ठीक से काम नहीं कर रहा था। बार-बार साइबर कैफे के चक्कर लगा रही थी। डर लग रहा था कि अगर छात्रवृत्ति नहीं मिली तो कॉलेज की फीस कैसे भरेंगे।” उस जैसी हजारों छात्राएं और छात्र इसी चिंता से जूझ रहे थे। कई छात्रों के दस्तावेज अपलोड नहीं हो पा रहे थे, तो कहीं डीएनओ स्तर पर वेरिफिकेशन अटक गया था। समय सीमा नजदीक आने से घबराहट और बढ़ रही थी।
शिकायतों की बाढ़ और बढ़ता दबाव
छात्रहित सर्वोपरि मंच (प्रदेश इकाई, झारखंड) के पास अलग-अलग जिलों से लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं। अभिभावक फोन कर रहे थे, छात्र सोशल मीडिया के जरिए अपनी परेशानी बता रहे थे। संगठन के पदाधिकारियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और संबंधित विभाग के अधिकारियों से मिलकर तिथि बढ़ाने की मांग रखी। उनका कहना था कि तकनीकी खामियों की सजा छात्रों को नहीं मिलनी चाहिए।
बढ़ी तारीख, लौटी राहत
आखिरकार विभाग ने तिथि विस्तार का आदेश जारी कर दिया।
- आवेदन में सुधार (Edit Option) की अंतिम तिथि अब 10 मार्च 2026
- DNO स्तर पर वेरिफिकेशन की अंतिम तिथि अब 14 मार्च 2026
यह खबर फैलते ही छात्रों ने राहत की सांस ली। कई कॉलेजों में छात्र एक-दूसरे को फोन कर जानकारी देने लगे। सोशल मीडिया पर भी छात्रों ने इसे बड़ी राहत बताया।
“यह सिर्फ तारीख नहीं, उम्मीद का विस्तार है”
छात्रहित सर्वोपरि मंच के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार राणा ने कहा, “यह सिर्फ तारीख बढ़ने का मामला नहीं है। यह उन छात्रों की उम्मीद का विस्तार है, जिनकी पढ़ाई इस छात्रवृत्ति पर निर्भर है।” प्रदेश उपाध्यक्ष आमिर हमजा, संगठन प्रभारी कुणाल पोद्दार और प्रदेश सचिव रईस अंसारी ने भी कहा कि संगठन आगे भी छात्रहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देगा।
आगे की राह
हालांकि तारीख बढ़ने से राहत जरूर मिली है, लेकिन छात्रों की मांग है कि पोर्टल की तकनीकी खामियों को स्थायी रूप से ठीक किया जाए, ताकि हर साल ऐसी परेशानी न हो। फिलहाल, छात्रों के लिए यह फैसला किसी बड़ी जीत से कम नहीं। जिन घरों में पिछले कुछ दिनों से चिंता का साया था, वहां अब फिर से पढ़ाई और भविष्य की बातें हो रही हैं।
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