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News Samvad : मनोज बाजपेयी की अपकमिंग फिल्म “घूसखोर पंडत” के टाइटल को लेकर विवाद लगातार बढ़ता चला गया। फिल्म का टीजर सामने आने के बाद ब्राह्मण समुदाय के कई संगठनों ने फिल्म के नाम और उसके प्रमोशनल कंटेंट पर आपत्ति जताई।
उनका कहना था कि फिल्म का टाइटल समाज और एक विशेष समुदाय की छवि को गलत तरीके से दिखाता है और इससे लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं।
ब्राह्मण समुदाय ने जताया विरोध
टीजर रिलीज होने के बाद ब्राह्मण समाज के लोगों ने फिल्म पर बैन लगाने की मांग की। विरोध इतना तेज हो गया कि अलग अलग जगहों पर प्रदर्शन किए गए और मनोज बाजपेयी के पुतले भी जलाए गए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि फिल्म का नाम अपमानजनक है और इससे समाज के एक वर्ग को गलत नजर से दिखाया जा रहा है।
मामला पहुंचा दिल्ली हाई कोर्ट
विवाद बढ़ने के बाद फिल्म के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याचिका में कहा गया कि फिल्म का नाम और प्रचार सामग्री आपत्तिजनक हैं और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है।
याचिका के जरिए कोर्ट से फिल्म के टाइटल और प्रमोशन पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
मेकर्स ने बदले टाइटल का दिया भरोसा
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान फिल्म के मेकर्स ने अदालत को बताया कि वे फिल्म का टाइटल बदलने के लिए तैयार हैं। मेकर्स ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
मेकर्स ने कोर्ट को यह भी बताया कि फिल्म का नया टाइटल जल्द ही घोषित किया जाएगा।
नेटफ्लिक्स ने दी अपनी सफाई
नेटफ्लिक्स की तरफ से भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया सामने आई। कंपनी ने कहा कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और वे सभी वर्गों का सम्मान करते हैं।
नेटफ्लिक्स ने यह भी साफ किया कि विवाद को देखते हुए मेकर्स के फैसले का पूरा समर्थन किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में दर्ज हुई एफआईआर
विवाद के दौरान उत्तर प्रदेश में फिल्म के निर्देशक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। इसके अलावा मध्य प्रदेश में भी राजनीतिक दलों और संगठनों ने फिल्म के नाम को लेकर नाराजगी जाहिर की।
कई जगहों पर प्रशासन से फिल्म को बैन करने की मांग की गई।
मनोज बाजपेयी का सोशल मीडिया पोस्ट
इस पूरे विवाद के बीच मनोज बाजपेयी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि अगर आप किसी ऐसी चीज का हिस्सा हैं जिससे कई लोगों को तकलीफ हो रही है, तो आपको रुककर सुनना चाहिए।
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा।
निर्देशक नीरज पांडेय ने क्या कहा
फिल्म के निर्देशक नीरज पांडेय ने सफाई देते हुए कहा कि यह फिल्म पूरी तरह से एक फिक्शनल पुलिस ड्रामा है। उन्होंने बताया कि “पंडत” नाम केवल एक काल्पनिक नाम है और इसका किसी समुदाय से कोई सीधा संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी समाज या वर्ग का अपमान करना नहीं था।
फिल्म की कहानी और किरदार
फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म की कहानी में लोग उन्हें “पंडत” कहकर बुलाते हैं।
यह फिल्म नीरज पांडेय और रीतेश शाह द्वारा लिखी और निर्देशित की गई है।
फिल्म की स्टार कास्ट
फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ नुशरत भरूचा और श्रद्धा दास भी अहम भूमिकाओं में नजर आने वाली हैं। यह फिल्म एक क्राइम और पुलिस ड्रामा पर आधारित बताई जा रही है।
फिलहाल विवाद के चलते फिल्म का नया टाइटल क्या होगा, इसकी आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
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