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Ranchi : 31 अक्टूबर की दोपहर रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री के दफ्तर में माहौल कुछ अलग था। रोज की तरह यह सिर्फ प्रशासनिक बैठक नहीं थी, बल्कि भावनाओं, मुस्कानों और कुछ नमी भरी आंखों का संगम था। कारण भी खास था… शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों की सेवा देने वाले 10 शिक्षकों को उनके रिटायरमेंट के दिन सम्मानित किया जा रहा था।
सम्मान का पल और जीवनभर की यादें
“आज हम सिर्फ विदाई नहीं दे रहे, बल्कि आपके योगदान को प्रणाम कर रहे हैं।” डीसी भजंत्री के इन शब्दों के साथ हॉल तालियों से गूंज उठा। मंच पर एक-एक कर वे सभी शिक्षक बुलाए जा रहे थे जिन्होंने दशकों तक बच्चों को अक्षरज्ञान दिया, समाज को दिशा दी। किसी के चेहरे पर गर्व झलक रहा था, तो किसी की आंखें पुराने दिनों की यादों में खो गई थीं।
जिला प्रशासन की यह पहल इसलिए भी खास रही क्योंकि सभी शिक्षकों को सेवानिवृत्ति के दिन ही उनके रिटायरमेंट लाभ जैसे पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सुविधाएं सौंप दी गईं। आम तौर पर यह प्रक्रिया महीनों तक चलती है, लेकिन रांची प्रशासन ने इसे उसी दिन पूरा कर एक मिसाल पेश की।
“सेवानिवृत्ति अंत नहीं, एक नई शुरुआत है”
डीसी मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा, “शिक्षक वह दीपक हैं जो दूसरों को प्रकाश देते हुए खुद जलते रहते हैं। आज जब आप सेवा से निवृत्त हो रहे हैं, यह अंत नहीं बल्कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत है। अपने अनुभवों से समाज को आगे भी दिशा देते रहें।” उनके इन शब्दों से कई चेहरों पर मुस्कान लौट आई। डीसी भजंत्री ने हर सेवानिवृत्त शिक्षक को शाल ओढ़ाई, मोमेंटो दिया और व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। जाते-जाते डीसी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब रोज़ सुबह स्कूल की घंटी नहीं बजेगी, पर ज़िंदगी की नई घंटी ज़रूर बजेगी। खुद को व्यस्त रखें, खुश रहें और समाज के लिए प्रेरणा बने रहें।”
इन शिक्षकों को मिला सम्मान
सम्मान पाने वालों में नामकुम, कांके, मांडर और रांची शहर के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक शामिल थे। इनमें अलका रानी देमता, अमृता सहाय, निर्मला एक्का, जेएसपीडी मिंज, मुक्ता कुमारी एक्का, सुरेंद्र बारला, सलोमी एक्का, सरोजनी एक्का, प्रभा कुजूर और फुलकेरिया भवरा प्रमुख हैं। हर किसी की कहानी अलग थी। किसी ने 35 साल तक गांव के बच्चों को पढ़ाया, तो किसी ने शहर के स्कूल में सैकड़ों बच्चों को सफलता की राह दिखाई।

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