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Pryagraj : माघ मास की पूर्णिमा यानी माघी पूर्णिमा आज, रविवार को मनाई जा रही है। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. अनुराग तिवारी के मुताबिक इस बार माघी पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जिससे इस पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ माह में सभी देवता पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं और माघ पूर्णिमा के दिन त्रिवेणी संगम में स्नान कर अपने-अपने धाम लौट जाते हैं। इसी कारण इस दिन संगम सहित देश की पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व माना गया है।
काशी के ज्योतिषाचार्य पं. अनुराग तिवारी बताते हैं कि माघ पूर्णिमा पर किया गया स्नान, दान और पूजा व्यक्ति के पापों के क्षय के साथ जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है। इसी तिथि के साथ प्रयागराज में एक माह से चल रहा कल्पवास भी पूर्ण हो जाता है।
संगम के साथ इन नदियों में स्नान का महत्व
पं. तिवारी के अनुसार आज के दिन गंगा नदी, यमुना नदी, नर्मदा नदी और शिप्रा नदी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। जो श्रद्धालु किसी कारणवश नदी या तीर्थ तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान करते समय सभी तीर्थों और पवित्र नदियों का स्मरण करना शुभ बताया गया है।
स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देने का विधान
पं. अनुराग तिवारी के अनुसार स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे में जल, कुमकुम, लाल फूल और अक्षत डालें तथा पूर्व दिशा की ओर मुख करके ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जप करते हुए अर्घ्य अर्पित करें। मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य, यश और आत्मबल में वृद्धि होती है।
दान-पुण्य से कई गुना बढ़ जाता है फल
पं. तिवारी बताते हैं कि माघी पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व है। इस दिन जरूरतमंदों को वस्त्र, तिल-गुड़, ऊनी कपड़े, भोजन व अनाज और धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इसके साथ ही गोशालाओं में गायों को हरी घास खिलाना और उनकी सेवा के लिए दान देना भी शुभ फल प्रदान करता है।
विष्णु-लक्ष्मी और चंद्रदेव की विशेष पूजा
पं. अनुराग तिवारी के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए। दक्षिणावर्ती शंख में दूध, जल और पंचामृत भरकर भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करें तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’
मंत्र का जप करें। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता आती है।
सुबह शिवलिंग पर चंद्र अभिषेक
पं. अनुराग तिवारी बताते हैं कि माघ पूर्णिमा की सुबह भगवान शिव के शिवलिंग पर चंद्रदेव का अभिषेक करना विशेष फलदायी माना गया है। शिवलिंग पर चंदन का लेप करें और बिल्वपत्र व धतूरा अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे मानसिक तनाव दूर होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
आज कल्पवास का विधिवत समापन
माघ मास के दौरान प्रयागराज के संगम तट पर साधु-संतों और श्रद्धालुओं द्वारा एक माह तक कल्पवास किया जाता है। कल्पवासी पूरे महीने संयम, ब्रह्मचर्य, नियमपूर्वक जीवन, नियमित स्नान, पूजा और जप-तप करते हैं। पं. अनुराग तिवारी के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन विशेष स्नान, दान और पूजा के बाद कल्पवासी अपने व्रत का विधिवत समापन करते हैं।
क्या करें
- पवित्र नदी में स्नान करें, संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
- जरूरतमंदों को यथाशक्ति दान अवश्य करें।
- विष्णु-लक्ष्मी, चंद्रदेव और भगवान शिव की पूजा करें।
- पूरे दिन संयम, सेवा और श्रद्धा भाव बनाए रखें।
क्या न करें
- इस दिन क्रोध, विवाद और कटु वाणी से बचें।
- मांस-मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- झूठ, छल-कपट और किसी का अपमान करने से दूर रहें।
- पूजा-पाठ और व्रत में आलस्य या लापरवाही न करें।
- दान के समय अहंकार या दिखावे से बचें।
पं. अनुराग तिवारी के अनुसार, सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जा रही माघ पूर्णिमा श्रद्धा और विधि-विधान से मनाने पर मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।
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