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Ranchi : 30 जनवरी की शाम जब रांची की ठंडी हवा परिसर में फैल रही थी, उसी समय Indian Institute of Information Technology Ranchi के लैब और हॉल में कुछ अलग ही गर्माहट थी। लैपटॉप की स्क्रीन पर भागते कोड, व्हाइटबोर्ड पर बने अधूरे आइडिया और कॉफी के खाली कप इस बात की गवाही दे रहे थे कि यहां सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी चल रही थी। यह मौका था क्वासर एक्सएआई हैकाथॉन – एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के प्री-समिट आयोजन का।
अलग-अलग शहर, एक ही सपना
देश के अलग-अलग कोनों से आई 24 टीमों के छात्र पहली बार एक ही छत के नीचे मिले थे। कोई Birla Institute of Technology Mesra से आया था, तो कोई National Institute of Technology Jamshedpur से। कुछ छात्र Indian Institute of Information Technology Bhagalpur और National Institute of Advanced Manufacturing Technology Ranchi जैसे संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। संस्थान अलग थे, भाषाएं अलग थीं, लेकिन सबका लक्ष्य एक ही था। ऐसा एआई समाधान बनाना, जो समाज की किसी असली समस्या को छू सके।

दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ विश्वास का सफर
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। मंच पर संस्थान के निदेशक राजीव श्रीवास्तव मौजूद थे। उनका संबोधन तकनीकी शब्दों से ज्यादा भरोसे से भरा था। उन्होंने छात्रों से कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल तकनीक नहीं, बल्कि समाज की जरूरतों को समझने का माध्यम है। यही बात कई छात्रों के लिए इस हैकाथॉन की दिशा तय कर गई।
जब टाइमर चालू हुआ, तो डर भी था और जुनून भी
जैसे ही 24 घंटे के हैकाथॉन का टाइमर चालू हुआ, माहौल बदल गया। कोई टीम स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्या पर काम कर रही थी,
कोई कृषि और ग्रामीण जरूरतों को लेकर मॉडल बना रही थी, तो कोई शिक्षा और ट्रैफिक जैसी रोजमर्रा की चुनौतियों पर समाधान ढूंढ रही थी। पहले कुछ घंटों में उत्साह था, लेकिन आधी रात के बाद थकान भी साफ नजर आने लगी। फिर भी, किसी ने हार नहीं मानी।
रात तीन बजे की खामोशी और जूझते चेहरे
रात के करीब तीन बजे लैब में एक अजीब सी शांति थी। कीबोर्ड की आवाज और स्क्रीन पर चलती कोड की लाइनें ही माहौल तोड़ रही थीं। कुछ छात्र अपने मॉडल के बार-बार फेल हो जाने से परेशान थे। किसी की टीम का डेटा काम नहीं कर रहा था। किसी को एल्गोरिद्म की गलती समझ नहीं आ रही थी। यही वह समय था, जब मेंटर्स छात्रों के लिए उम्मीद बनकर पहुंचे।
मार्गदर्शन जो सिर्फ तकनीकी नहीं था
निरीक्षण के दौरान निदेशक प्रोफेसर राजीव श्रीवास्तव और निर्णायक मंडल के सदस्यों ने टीमों से सीधे बात की। वे सिर्फ कोड नहीं देख रहे थे, बल्कि यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि छात्र क्या बनाना चाहते हैं और क्यों। यही बातचीत कई टीमों को दोबारा खड़े होने की ताकत दे गई।
तीन चरणों में परखा गया हर विचार
पहला मूल्यांकन शाम को हुआ। दूसरा मूल्यांकन आधी रात के बाद और अंतिम मूल्यांकन अगली सुबह। हर बार छात्रों के चेहरे पर एक ही सवाल था… क्या हमारा समाधान वाकई किसी के काम आ सकता है? यह हैकाथॉन सिर्फ प्रतियोगिता नहीं रह गया था, बल्कि एक सीखने की प्रक्रिया बन चुका था।

अंतिम दिन की सुबह और थकी आंखों में उम्मीद
31 जनवरी की सुबह जब अंतिम मूल्यांकन शुरू हुआ, तब कई छात्र पूरी रात जाग चुके थे। लेकिन प्रस्तुति के समय उनके चेहरे पर थकान नहीं, आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था। हर टीम ने अपने विचार, मॉडल और प्रयोग को पूरे मन से प्रस्तुत किया।
जब मंच से मिला असली जीवन का रास्ता
मूल्यांकन के बाद मुख्य वक्ता प्रवीण कुमार ने छात्रों को संबोधित किया। प्रवीण कुमार Indian Institute of Technology Patna के एफआईएसटी टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि कैसे कॉलेज प्रोजेक्ट से निकलकर स्टार्टअप और वास्तविक समाधान तक का सफर तय किया जा सकता है। कई छात्रों के लिए यह सत्र भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हुआ।
जीत सिर्फ ट्रॉफी की नहीं थी
विजेता घोषित होने पर जब IIIT रांची की टीम ऊप्स 404 का नाम पुकारा गया, तो उनकी आंखों में राहत और खुशी दोनों साफ नजर आ रही थीं। इसके बाद BIT मेसरा की टीम एआई एवेंजर्स और NIT जमशेदपुर की टीम टीम वास को भी मंच पर सम्मानित किया गया। लेकिन असली जीत उन छात्रों की थी, जो पहली बार इतने बड़े स्तर पर अपनी सोच को दुनिया के सामने रख पाए।

विशेष पुरस्कारों ने बढ़ाया आत्मविश्वास
IIIT भागलपुर की टीम को सर्वश्रेष्ठ एआई कार्यान्वयन और IIIT रांची की टीम को सर्वश्रेष्ठ नवोन्मेषी विचार के लिए विशेष पुरस्कार मिला। छोटे पुरस्कार थे, लेकिन उनका मनोबल बहुत बड़ा था।
अंत में एक साझा एहसास
कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन के दौरान एक बात साफ महसूस हुई। यह हैकाथॉन सिर्फ 24 घंटे का तकनीकी आयोजन नहीं था। यह छात्रों के लिए खुद को पहचानने, अपनी सीमाओं से लड़ने और समाज के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश का मंच था।
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