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News Samvad : विशेषज्ञों का कहना है कि वयस्कों के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति लगातार 10 से 12 घंटे या उससे अधिक सोता है, तो यह सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। हेल्थ रिसर्च और मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा नींद लेने वाले लोगों का दिमाग धीरे काम करने लगता है। ऐसे लोग अक्सर सुस्ती, ध्यान की कमी और सोचने की गति में गिरावट जैसी समस्याओं का शिकार हो जाते हैं। लम्बे समय तक ओवरस्लीपिंग करने से मेमोरी कमजोर हो सकती है और मानसिक सतर्कता कम हो जाती है। इतना ही नहीं, ज्यादा सोने से एंजायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
दिल और शुगर पर असर
अध्ययनों में पाया गया है कि ओवरस्लीपिंग से दिल की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा सोने वालों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट डिजीज का खतरा अधिक होता है। खासकर जब इसके साथ शारीरिक गतिविधि की कमी और सेडेंटरी लाइफस्टाइल जुड़ा हो, तो खतरा और भी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा नींद लेने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, जिससे वजन बढ़ने और मोटापे की समस्या शुरू हो सकती है। कई रिसर्च बताती हैं कि ओवरस्लीपिंग से इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
कब लें डॉक्टर की सलाह
अगर कोई व्यक्ति रोजाना 10-12 घंटे सोने के बाद भी थका हुआ महसूस करता है, तो यह गंभीर बीमारी जैसे स्लीप एप्निया, डिप्रेशन या थायरॉइड का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
क्या करें
हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अच्छी सेहत के लिए रोजाना एक तय समय पर सोने और जागने की आदत डालें। नींद का समय 7 से 8 घंटे तक ही सीमित रखें, ताकि शरीर खुद को रिपेयर कर सके और दिमाग भी ऊर्जा से भरपूर रह सके।
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