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News Samvad : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने खानपान, नींद और मानसिक शांति पर ध्यान नहीं दे पाते। इसका असर शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यक्ति का व्यवहार और भावनाएं भी उसकी सेहत पर गहरा प्रभाव डालती हैं। अगर कोई व्यक्ति अक्सर गुस्सा करता है या चिड़चिड़ा रहता है, तो यह केवल स्वभाव की बात नहीं बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा जोखिम भी हो सकता है।
गुस्सा आने के पीछे छिपे कारण
डॉक्टरों के अनुसार ज्यादा गुस्सा आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें तनाव, चिंता, नींद की कमी, हार्मोनल असंतुलन, पारिवारिक समस्याएं, आर्थिक दबाव और काम का तनाव शामिल हैं। जब व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है तो मस्तिष्क का भावनाओं को नियंत्रित करने वाला हिस्सा ज्यादा सक्रिय हो जाता है, जिससे गुस्सा जल्दी आता है। नींद की कमी भी बड़ा कारण है। इससे शरीर में तनाव हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन बढ़ जाते हैं और शरीर हमेशा सतर्क या तनाव की स्थिति में रहता है।
गुस्से का शरीर पर तुरंत असर
जब व्यक्ति गुस्सा करता है तो शरीर में कई बदलाव होते हैं। दिल की धड़कन तेज हो जाती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और मांसपेशियों में तनाव आता है। यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है, लेकिन बार-बार ऐसा होने पर नुकसान हो सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञ बताते हैं कि ज्यादा गुस्सा करने वालों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा अधिक होता है। गुस्से के समय रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और दिल तेजी से खून पंप करता है। अगर यह स्थिति बार-बार हो तो स्थायी रूप से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इससे दिल, किडनी और दिमाग पर गंभीर असर पड़ सकता है।
दिल की बीमारियों का जोखिम
लगातार गुस्सा करने से दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। समय के साथ दिल कमजोर हो सकता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि ज्यादा गुस्सा करने वाले लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में कई गुना तक बढ़ सकता है। शरीर में सूजन बढ़ने से धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्ट्रोक का भी बढ़ सकता है खतरा
गुस्से के दौरान अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने से मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है। इससे रक्त वाहिका फटने का खतरा होता है और स्ट्रोक की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए बार-बार गुस्सा करना केवल भावनात्मक समस्या नहीं बल्कि गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी है।
मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर
बार-बार गुस्सा करने से व्यक्ति में नकारात्मक सोच विकसित हो सकती है। इससे चिड़चिड़ापन, असंतोष और मानसिक अस्थिरता बढ़ती है। लंबे समय तक यह स्थिति रहने पर चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
क्या करें बचाव के लिए
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गुस्से को नियंत्रित करना जरूरी है। इसके लिए पर्याप्त नींद लें, नियमित व्यायाम करें, ध्यान और योग करें, संतुलित भोजन लें और तनाव कम करने की कोशिश करें। जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक या डॉक्टर से सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है।
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