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Ayodhya : बुधवार को अयोध्या पहुंचे और श्रीराम मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने परिसर के परकोटे में बने शिव मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराया। यह मंदिर ईशान कोण में यज्ञशाला के सामने स्थित है, जहां करीब 5 फीट का शिवलिंग स्थापित है।
वैदिक मंत्रों के बीच हुआ कार्यक्रम
ध्वजारोहण से पहले मुख्यमंत्री ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया। पूरे कार्यक्रम को वैदिक आचार्यों की मौजूदगी में पारंपरिक तरीके से पूरा किया गया। मंदिर परिसर में भक्तों और संतों के बीच खास उत्साह देखा गया।
अन्य मंदिरों में भी चल रहा ध्वज आरोहण
श्रीराम मंदिर परिसर के दूसरे उपमंदिरों में भी ध्वज चढ़ाने का कार्यक्रम जारी है। माता भगवती मंदिर में साध्वी रितम्भरा ध्वज फहराएंगी, जबकि शेषावतार मंदिर में Keshav Prasad Maurya ध्वजारोहण करेंगे। इस मौके पर Rashtriya Swayamsevak Sangh और Vishwa Hindu Parishad के प्रतिनिधियों के साथ कई संत-महंत भी मौजूद रहे।
मौसम बना बाधा, हेलीकॉप्टर को बदलना पड़ा रास्ता
सीएम योगी का कार्यक्रम शाम 4:45 बजे तय था, लेकिन अचानक मौसम खराब हो गया। तेज हवा, हल्की बारिश और घने बादलों के कारण उनका हेलीकॉप्टर राम कथा पार्क में उतर नहीं सका। इसके बाद हेलीकॉप्टर को Maharishi Valmiki International Airport पर उतारा गया।
इसके बाद मुख्यमंत्री करीब 5:17 बजे Ram Mandir Ayodhya पहुंचे, जहां उनका स्वागत किया गया।
1000 मेहमानों की मौजूदगी, दिया संबोधन
इस कार्यक्रम में करीब 1000 मेहमानों को बुलाया गया था। इसमें वीएचपी, संघ और भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे। कार्यक्रम के बाद सीएम योगी ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित भी किया।
रामजन्मभूमि आंदोलन पर कही बड़ी बात
सीएम योगी ने कहा कि जब Rashtriya Swayamsevak Sangh ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाया तो यह और मजबूत होता गया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने समाज में जाति की दीवार को तोड़ने का काम किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के किसी भी हिस्से में जाएं, लोगों के मुंह से जय श्री राम ही सुनाई देता है। उनके मुताबिक, श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन भारत के इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय है।
298 साल पहले की घटना का जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से करीब 298 साल पहले एक ऐसी रात आई थी जब राम मंदिर को अपवित्र कर विवादित ढांचा खड़ा किया गया था। लेकिन तब से लेकर अब तक ऐसा कोई दिन नहीं रहा जब लोगों ने राम जन्मभूमि के बारे में सोचना बंद किया हो।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का सपना हर वर्ग के लोगों के मन में था, चाहे वह गांव में रहने वाला हो या शहर में।
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