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Patna : बिहार में तेजी से बढ़ रहे वाहनों की संख्या ने वायु प्रदूषण की समस्या को गंभीर बना दिया है। इसका असर पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए परिवहन विभाग ने “प्रदूषण जांच केंद्र प्रोत्साहन योजना” के तहत सभी प्रखंडों में प्रदूषण जांच केंद्र (पीयूसी) खोलने की पहल की है।
132 प्रखंडों में नहीं था कोई पीयूसी केंद्र
विभाग के अनुसार, अब तक प्रदेश के 132 प्रखंडों में एक भी पीयूसी केंद्र नहीं था। इन्हें स्थापित करने के लिए 46 प्रखंडों को 1 करोड़ 5 लाख 72 हजार 576 रुपये की अनुदान राशि जारी की गई है।
किन जिलों में कितने नए केंद्र खुलेंगे
- भभुआ : 5 केंद्र
- बांका : 4 केंद्र
- मधुबनी : 4 केंद्र
- दरभंगा : 3 केंद्र
- गया : 3 केंद्र
- जहानाबाद : 3 केंद्र
- कटिहार : 3 केंद्र
- मधेपुरा : 2 केंद्र
- नालंदा : 2 केंद्र
- नवादा : 2 केंद्र
- रोहतास : 2 केंद्र
- सहरसा : 2 केंद्र
- शेखपुरा : 2 केंद्र
- सिवान : 2 केंद्र
- समस्तीपुर : 1 केंद्र
- मुजफ्फरपुर : 1 केंद्र
- मुंगेर : 1 केंद्र
- छपरा : 1 केंद्र
- अरवल : 1 केंद्र
वर्तमान में कितने केंद्र काम कर रहे हैं
राज्य में फिलहाल 1553 पीयूसी केंद्र संचालित हैं। इनमें —
- पटना: 264 केंद्र (सबसे अधिक)
- मुजफ्फरपुर: 81
- गया: 76
- वैशाली: 74
- छपरा: 66
- समस्तीपुर: 62
इन केंद्रों पर अधिक से अधिक वाहनों की प्रदूषण जांच की जाती है।
अनुदान और शर्तें
योजना के तहत प्रदूषण जांच उपकरण खरीदने पर 50% या अधिकतम 3 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इससे प्रखंड स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
- पीयूसी केंद्र पेट्रोल पंप या वाहन सर्विस सेंटर पर नहीं खोले जा सकते।
- लाभ केवल उसी प्रखंड के स्थायी निवासी ले सकते हैं, जहां केंद्र स्थापित होगा।
- आवेदक के पास वाहन रखरखाव/सर्विसिंग का व्यवसाय होना चाहिए।
- आवेदक या उनके स्टाफ के पास मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में डिग्री/डिप्लोमा, इंटरमीडिएट या मोटर वाहन संबंधित आईटीआई की योग्यता होनी चाहिए।
आवेदन प्रक्रिया
इच्छुक आवेदक को जिला परिवहन कार्यालय में ये दस्तावेज जमा करने होंगे –
- मोटरयान निरीक्षक का जांच प्रतिवेदन
- प्रदूषण जांच केंद्र का फोटो
- केंद्र के लिए जारी अनुज्ञप्ति की छायाप्रति
- उपकरण का कैलिब्रेशन प्रमाण पत्र
- अनुदान के लिए अनुरोध पत्र
- केंद्र के कार्यरत रहने का प्रमाण पत्र
- जिला परिवहन पदाधिकारी का अनुदान आवंटन अनुरोध पत्र
संचालन की अनिवार्यता
- केंद्र को कम से कम तीन साल तक चलाना अनिवार्य होगा।
- पेट्रोल और डीजल दोनों वाहनों के लिए स्मोक मीटर और गैस एनालाइजर उपकरण होना जरूरी है।
इस योजना से राज्य में प्रदूषण की रोकथाम के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
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