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Garhwa (Nityanand Dubey) : झालसा यानी झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कौशल किशोर झा के निर्देश पर गढ़वा जेल का विशेष निरीक्षण किया गया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के सुकन्या सांता बनाम भारत संघ मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य जेलों में जाति आधारित भेदभाव और श्रम विभाजन जैसी प्रथाओं को समाप्त करना है।
निरीक्षण का नेतृत्व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की सचिव निभा रंजना लकड़ा ने किया। उन्होंने विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों के व्यक्तिगत विवरणों और श्रम रजिस्टरों का गहन मूल्यांकन किया। निरीक्षण में विशेष ध्यान यह रखा गया कि किसी भी कैदी को उसकी जाति के आधार पर कोई अलग या विशेष कार्य न सौंपा जाए।
सचिव लकड़ा ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि श्रम का आवंटन निष्पक्ष और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप हो। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय जेलों में जाति आधारित भेदभाव और अलगाव को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे कारागार व्यवस्था अधिक न्यायसंगत और मानवीय बन सकेगी।”
निरीक्षण के दौरान गढ़वा एसडीओ और प्रभारी जेल अधीक्षक संजय कुमार, एलईडीसी सुधीर कुमार तिवारी सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने सचिव के निर्देशों का समर्थन करते हुए जेल में सुधार की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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