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Home » धर्मगुरुओं ने भरी हुंकार, बाल विवाह खत्म करने का लिया ऐतिहासिक संकल्प
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धर्मगुरुओं ने भरी हुंकार, बाल विवाह खत्म करने का लिया ऐतिहासिक संकल्प

September 14, 2025No Comments2 Mins Read
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बाल विवाह
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Garhwa (Nityanand Dubey) : समाज में जड़ जमाए बाल विवाह की कुप्रथा को खत्म करने के लिए गढ़वा जिले में एक अनोखी पहल की गई। लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान और जस्ट राइट्स फ़ॉर चिल्ड्रन द्वारा 12 से 14 सितंबर तक आयोजित “वैश्विक अंतर-धार्मिक प्रतिज्ञा सप्ताहांत” का समापन रविवार को हुआ। इस दौरान मंदिर, मस्जिद और चर्च के धर्मगुरु एक मंच पर आए और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए बाल विवाह को रोकने का संकल्प लिया।

इस्लाम में बाल विवाह का कोई स्थान नहीं

गढ़वा जामा मस्जिद के इमाम अब्दुल सम्मत ने कहा कि इस्लाम में विवाह परिपक्वता और जिम्मेदारी का अनुबंध है, जिसे बच्चा निभा ही नहीं सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा… “बाल विवाह रोकना धर्म और समाज की रक्षा है।”

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बाल विवाह का अंत ही भारत की समृद्धि 

नगर उंटारी स्थित बंशीधर मंदिर के पुजारी बृज किशोर तिवारी और अंजनी पांडे ने कहा कि बचपन सीखने और विकास का समय है। विवाह तभी होना चाहिए जब बच्चा शिक्षित और परिपक्व हो। उन्होंने समाज से आह्वान किया… “बेटियों को पढ़ाएं और कहें, बाल विवाह का अंत ही भारत की समृद्धि।”

बचपन सद्गुण सीखने का समय

सेन्हा ठाकुर बाड़ी और लगमा ब्रह्मस्थान के पुजारियों ने गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि बचपन सद्गुण सीखने का समय है, विवाह का बोझ ढोने का नहीं।

बाल विवाह छीन लेता है बच्चों के अधिकार

भंडरिया प्रखंड के कैथोलिक चर्च के फादर वाल्टर हेमरोम ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के अधिकार छीन लेता है और उनके मानसिक व शारीरिक विकास में बाधा बनता है।

सामूहिक शपथ के साथ समापन

कार्यक्रम के अंत में सभी धर्मगुरुओं ने समाज को शपथ दिलाई कि वे बाल विवाह को रोकेंगे और शिक्षा को बढ़ावा देंगे। इस मौके पर बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति और सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

इसे भी पढ़ें : मैदान में पसीना, मंच पर मुस्कान… जब पुलिस जवान बने खिलाड़ी

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