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Ranchi : रांची की अदालत के गलियारों में जब पति-पत्नी आमने-सामने बैठकर गिले-शिकवे भूलकर मुस्कुरा उठे, तो यह नजारा वहां मौजूद हर किसी के चेहरे पर खुशी ले आया। झालसा यानी झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और डालसा यानी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची की इस अनोखी पहल का यही मकसद है… लोगों को कोर्ट की लंबी लड़ाई से निकालकर बातचीत और आपसी समझदारी से समाधान की राह दिखाना।
परिवार ही बना ताक़त
पांच दिवसीय विशेष मध्यस्थता अभियान की शुरुआत 15 सितंबर से हुई है। इस दौरान परिवार न्यायालय और अन्य अदालतों से आए विवादों को मध्यस्थों के पास भेजा जा रहा है। तीसरे दिन 41 मामले और चौथे दिन 45 मामले पहुंचे, जिनमें से 40 मामलों का समाधान कुछ घंटों की बातचीत में हो गया। हैरानी की बात है कि जिन रिश्तों को लोग सालों से टूटा मान रहे थे, वे कुछ शब्दों की गर्माहट से फिर से जुड़ गए।
समय, पैसा और रिश्ते… तीनों की बचत
अभियान का असर कोर्ट-कचहरी की भीड़ पर भी दिख रहा है। जिन मामलों को निपटने में सालों लग जाते, वे अब कुछ बैठकों में ही खत्म हो रहे हैं। वादकारियों को न सिर्फ राहत मिल रही है बल्कि खर्च और तनाव से भी छुटकारा मिल रहा है। एक महिला प्रतिभागी ने खुशी जताते हुए कहा—“हम सोच भी नहीं सकते थे कि हमारा मामला इतनी आसानी से सुलझ जाएगा। अब हम फिर से एक साथ नया जीवन शुरू कर रहे हैं।”
अभियान का मकसद रिश्तों को टूटने से बचाना
इस अभियान का मकसद सिर्फ केस निपटाना नहीं है, बल्कि रिश्तों को टूटने से बचाना है। मध्यस्थों की भूमिका यहां सबसे अहम है—वे किसी जज की तरह कठोर नहीं बल्कि एक मित्र, एक गाइड की तरह दोनों पक्षों से बात करते हैं। इसी कारण, लोग अपने मन की बातें खुलकर रखते हैं और समाधान भी सहजता से निकल आता है।
उम्मीद अभी बाकी है
यह पहल 19 सितंबर तक चलेगी। अभी भी कई मामले मध्यस्थता केंद्र में लंबित हैं और उम्मीद है कि उनमें से भी अधिकतर का हल निकल जाएगा। इस अभियान से साफ है कि अगर विवादों को सही दिशा दी जाए, तो वे न सिर्फ खत्म होते हैं बल्कि रिश्तों को और मजबूत बना जाते हैं।
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