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Ranchi : रांची के फैमिली कोर्ट में चल रहा एक केस सिर्फ कानून की लड़ाई नहीं था, यह एक बिखरे परिवार की कहानी थी। सगुफता आफरीन और उनके पति फिरोज अंसारी पिछले चार साल से अलग रह रहे थे। दोनों की शादी मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी, लेकिन छोटी-छोटी अनबन ने धीरे-धीरे दूरी इतनी बढ़ा दी कि दोनों ने साथ रहना छोड़ दिया। इस बीच उनके दो मासूम बच्चे – एक बेटा और एक बेटी – रोज अपने माता-पिता के बीच की खामोशी और अलगाव को झेल रहे थे।
बच्चों की आंखों में सवाल, पर जुबां खामोश
मां-बाप का झगड़ा हमेशा बच्चों पर भारी पड़ता। बेटा कई बार अपने पिता से मिलने की जिद करता, तो बेटी मां की आंखों से गिरे आंसू पोंछती और पूछती – “अम्मी, अब्बू हमारे साथ क्यों नहीं रहते?” यह सवाल किसी कोर्ट की फाइल में नहीं, बल्कि बच्चों के दिल में गूंज रहा था।
चार सिटिंग्स में बदला माहौल
मामला जब मध्यस्थता केंद्र आया तो अधिवक्ता मध्यस्थ अमरेंद्र कुमार ओझा ने दोनों पक्षों को बार-बार बैठाकर समझाया। उनके साथ अधिवक्ता प्रिंस कश्यप और पप्पु कुमार ने भी कोशिश जारी रखी। तीन-चार सिटिंग्स में धीरे-धीरे माहौल बदला। गुस्से और शिकायतों की जगह बातचीत और समझदारी ने ले ली। आखिरकार वह पल आया, जब पति-पत्नी ने तय किया कि वे अब पुरानी बातें भूल जाएंगे और बच्चों के भविष्य के लिए फिर से साथ रहेंगे।
पति की बातें सुन भर आई पत्नी की आंखें
जब पति ने पत्नी की ओर देखकर कहा– “अब तुम्हें और बच्चों को कभी शिकायत का मौका नहीं दूंगा”, तो पत्नी की आंखें भर आईं। उसने भी सिर झुकाकर हामी भर दी। वहीं जब बच्चों ने यह जाना कि अम्मी-अब्बू अब साथ रहेंगे, तो अचानक मुस्कुरा उठे। उनके लिए यह फैसला सिर्फ “मुकदमे का हल” नहीं, बल्कि घर में फिर से लौटती खुशियों की दस्तक थी।
बातचीत और धैर्य से जुड़ सकते हैं टूटे रिश्ते : DLSA सचिव रवि भास्कर
डालसा सचिव रवि कुमार भास्कर ने दोनों को बुके देकर शुभकामनाएं दीं और कहा… अपने बच्चों को अच्छे माहौल में पालें, क्योंकि वही आपके जीवन का सच्चा सहारा हैं। साथ ही उन्होंने संदेश दिया कि सही दिशा में बातचीत और धैर्य से टूटे रिश्ते भी जुड़ सकते हैं।
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