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Ranchi : रांची के सदर अस्पताल में आज नयी कीर्तिमान गढ़ा गया। राज्य के मशहूर और जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ जयंत कुमार घोष की नेतृत्व वाली टीम ने पित्त की नली (बाइल डक्ट) में होने वाले कैंसर का ERCP (Endoscopic Retrograde Cholangiopancreatography) तकनीक के जरिये सफल इलाज कर बेहतरीन कामयाबी हासिल कर ली। इस कामयाबी ने न केवल मरीज की जान बचाई, बल्कि कैंसर से जूझ रहे अन्य मरीजों के लिए भी नई उम्मीद जगाई है।
कैंसर का सामना और नई उम्मीद
पित्त नली में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में मरीज अक्सर दर्द, कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझते हैं। इस प्रकार के कैंसर में शुरुआती पहचान और सही समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है। सदर अस्पताल की टीम ने पेरीएम्पुलरी कार्सिनोमा और कोलाईनजियो कार्सिनोमा जैसे जटिल मामलों पर ERCP के माध्यम से स्टेंटिंग और बायोप्सी की प्रक्रिया पूरी की।
डॉ जयंत कुमार घोष ने बताया, “ERCP तकनीक के जरिए हम न केवल कैंसर का सटीक पता लगा सकते हैं, बल्कि मरीज के पित्त मार्ग को खोलकर उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार भी कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में मरीज को कम समय में राहत मिलती है और अस्पताल में लंबा रहना नहीं पड़ता।”
इस टीम ने हासिल की कामयाबी
इस बेहतरीन कामयाबी के पीछे सदर अस्पताल की पूरी टीम की मेहनत और समर्पण का बड़ा हाथ है। टीम में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ जयंत कुमार घोष के अलावा एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट डॉ वसुधा गुप्ता सिस्टर सीमा कुमारी, श्वेता तिग्गा, एमलिन तिग्गा, अनिक लकड़ा, नयन नितेश, शेषनाथ यादव, सेवक कुमार मंडल और अमित कुमार शामिल थे। टीम के हर सदस्य ने इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाई और मरीज को सुरक्षित इलाज मुहैया कराया।
‘असंभव इलाज रांची में ही हो गया संभव’
मरीज और उनके परिवार के लिए यह सफलता किसी वरदान से कम नहीं। मरीज के परिजनों ने बताया, “हमने कभी नहीं सोचा था कि इतने गंभीर कैंसर का इलाज रांची में ही संभव होगा। डॉ जयंत कुमार घोष और उनकी टीम ने हमारी जिंदगी बचाई। अब मरीज धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं और उनका हौसला बढ़ा है।”
झारखंड के अन्य अस्पतालों में भी उपलब्ध हो ERCP तकनीक : डॉ जयंत घोष
ERCP तकनीक न केवल कैंसर की पहचान में मदद करती है, बल्कि मरीज के जीवन को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सदर अस्पताल में इस तकनीक का उपयोग आने वाले समय में और अधिक मरीजों के लिए राहत का जरिया बनेगा। डॉ जयंत कुमार घोष ने कहा, “हम चाहते हैं कि यह तकनीक रांची और झारखंड के अन्य अस्पतालों में भी उपलब्ध हो, ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीज इसका लाभ उठा सकें। यह सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी बचाने का एक प्रयास है।”
नई उम्मीद के साथ आगे की राह
सदर अस्पताल में इस सफलता के बाद न केवल मरीजों में बल्कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों में भी नई ऊर्जा और उम्मीद जगी है। सही समय पर सही तकनीक और विशेषज्ञों की टीम मिल जाए तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर भी काबू पाया जा सकता है। रांची के स्वास्थ्य क्षेत्र में यह उपलब्धि आने वाले समय में मरीजों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है।
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