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Ranchi : तीन महीनों से परदेस में फंसे झारखंड के 48 प्रवासी कामगार जब अपनी धरती पर उतरे तो उनके चेहरों पर राहत और आंखों में खुशी के आंसू थे। कोई मोबाइल पर अपनी पत्नी को बता रहा था “हम घर आ गए,” तो कोई बच्चों के लिए मिठाई खरीदने की बात कर रहा था। यह वह पल था जब हर मजदूर के लिए झारखंड सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि घर बनकर सामने था।
अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में पीसीएल प्रेम पावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड में काम कर रहे ये सभी मजदूर पिछले तीन महीनों से कठिन दौर से गुजर रहे थे। वेतन बंद हो गया था, खाने के भी लाले पड़ गए थे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि अब घर कैसे लौटें। उसी वक्त किसी ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन तक उनकी बात पहुंचाई।
सीएम हेमंत सोरेन ने मामला संज्ञान में आते ही इसे महज “प्रशासनिक मुद्दा” नहीं, बल्कि “मानवीय संकट” माना। उन्होंने तुरंत श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग को एक्टिव किया और राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को निर्देश दिया कि हर एक मजदूर को सुरक्षित घर लाना है। विभाग ने भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियों से लगातार संपर्क में रहकर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया।
तीन महीनों की पीड़ा, असुरक्षा और इंतजार के बाद आखिरकार सभी मजदूरों की वतन वापसी संभव हुई। हजारीबाग, गिरिडीह और बोकारो के इन मजदूरों ने जैसे ही झारखंड की मिट्टी पर कदम रखा, तो उन लोगों के मुख से यह निकला… भला हो सीएम हेमंत सोरेन का, जो मसीहा बनकर हमारी जिंदगी में आयें और हमें उस नर्क से वापस अपने वतन बुला लिया।
हेमंत सरकार ने अब इन परिवारों को पुनर्वास और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि हमारा हर श्रमिक झारखंड की ताकत है। चाहे वह देश में हो या विदेश में, उसकी जिम्मेदारी हमारी है।
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