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Ramgarh (Dharmendra Pradhan, Bhurkunda) : सुबह का समय था। थाना चौक के पास दुर्गा मंडप में हलचल धीरे धीरे बढ़ रही थी। कोई फूल सजा रहा था, कोई तस्वीर को ठीक कर रहा था। कारण खास था। देश को आजादी का सपना दिखाने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती। भुरकुंडा के लोगों के लिए यह सिर्फ एक तारीख नहीं थी, बल्कि यादों, सम्मान और प्रेरणा का दिन था।
फूलों के साथ उतरी श्रद्धा
जैसे ही नेताजी के चित्र पर पहला पुष्प अर्पित किया गया, माहौल गंभीर हो गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी की आंखों में सम्मान साफ झलक रहा था। लोगों ने न सिर्फ फूल चढ़ाए, बल्कि कुछ पल रुककर नेताजी के संघर्ष को मन ही मन याद भी किया।
आज भी जिंदा है आजादी का जज्बा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने नेताजी के जीवन संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन कर अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती दी। “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” जैसे शब्द आज भी लोगों के भीतर जोश भर देते हैं। वक्ताओं ने कहा कि नेताजी का जीवन हमें सिखाता है कि आजादी सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि त्याग और साहस की कहानी है।
नारों में गूंजा सम्मान
कुछ ही देर में माहौल बदल गया। “नेताजी जिंदाबाद” और “भारत माता की जय” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। यह नारे सिर्फ आवाज नहीं थे, बल्कि उस भावना की अभिव्यक्ति थे, जो पीढ़ियों से देशवासियों के दिल में बसी हुई है।
आम लोग, बड़ी सोच
इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें कोई औपचारिक मंच नहीं था, न ही लंबी भाषणबाजी। आम लोग थे, अपनी भावनाओं के साथ। भुरकुंडा पंचायत के मुखिया अजय पासवान, पूर्व मुखिया सुभाष दास, विजया रानी बोस, सतीश श्रीवास्तव, सतीश ठाकुर, विजेंद्र पासवान, मिथुन कुमार, श्रवण कुमार, किशोर कुमार, झीलकी रानी, उर्मिला, राजेश सिंह, विश्वरंजन सिन्हा सहित कई लोग चुपचाप शामिल हुए और नेताजी को नमन किया।
नई पीढ़ी के लिए संदेश
कार्यक्रम के अंत में लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ते हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस सिर्फ किताबों का नाम न बनें, बल्कि उनके विचार युवाओं के जीवन का हिस्सा बनें, यही इस आयोजन का असली मकसद है।
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