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Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में रूमेटोलॉजी और इम्यूनोलॉजी जैसे जटिल चिकित्सा क्षेत्र को नई पहचान देने वाले नामों में डॉ. देवनीस खेस्स प्रमुख बनकर उभरे हैं। मरीजों के इलाज से लेकर डॉक्टरों के प्रशिक्षण तक, उन्होंने एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया है जिससे राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार दिख रहा है। हाल ही में आयोजित ईस्ट जोन मिड टर्म CME 2026 ने इस दिशा में एक और मजबूत कदम रखा। इस कार्यक्रम के आयोजन सचिव रहे डॉ. देवनीस खेस्स ने पूर्वी भारत के 10 राज्यों के डॉक्टरों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान सुनिश्चित किया।
तीसरी बार संभाली बड़ी जिम्मेदारी
डॉ. देवनीस खेस्स के लिए यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मिशन जैसा है। वर्ष 2014, 2019 के बाद अब 2026 में उन्होंने तीसरी बार इस बड़े CME का नेतृत्व किया। इसके अलावा 2022 में ईस्ट ज़ोन रूमेटोलॉजी एसोसिएशन का वार्षिक सम्मेलन भी उन्होंने सफलतापूर्वक आयोजित कराया था। उनका मानना है कि डॉक्टरों को लगातार अपडेट रहना जरूरी है, तभी मरीजों को सही और बेहतर इलाज मिल सकता है।

झारखंड में रूमेटोलॉजी को दी नई पहचान
एक समय था जब जोड़ों के दर्द, ऑटोइम्यून बीमारियों और जटिल इम्यूनोलॉजिकल समस्याओं के लिए मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन डॉ. खेस्स जैसे विशेषज्ञों की पहल से अब झारखंड में ही इन बीमारियों का इलाज संभव हो रहा है। उन्होंने न सिर्फ इलाज को आसान बनाया, बल्कि जागरूकता बढ़ाने और डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने पर भी खास ध्यान दिया।

125 से अधिक डॉक्टरों को मिला सीखने का मौका
ईस्ट जोन CME 2026 में करीब 125 डॉक्टरों, पीजी और डीएनबी छात्रों ने हिस्सा लिया। यहां रूमेटोलॉजी और इम्यूनोलॉजी से जुड़ी नई तकनीकों, आधुनिक इलाज और क्लिनिकल अनुभवों पर विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. खेस्स का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों से युवा डॉक्टरों को सीखने का मौका मिलता है, जो आगे जाकर मरीजों के इलाज में काम आता है।

टीमवर्क से मिली सफलता
इस आयोजन की सफलता में ईस्ट जोन रूमेटोलॉजी एसोसिएशन और झारखंड रूमेटोलॉजी एसोसिएशन की टीम का अहम योगदान रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए डॉक्टरों ने इसे ज्ञान और सहयोग का मंच बना दिया। डॉ. खेस हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि मेडिकल क्षेत्र में टीमवर्क ही असली ताकत है।

मरीजों के लिए समर्पित एक डॉक्टर
डॉ. देवनीस खेस्स सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि एक ऐसे विशेषज्ञ हैं जो अपने राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि झारखंड के मरीजों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े और उन्हें यहीं उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिले। रांची से शुरू हुई यह पहल अब पूरे पूर्वी भारत तक फैल रही है। डॉ. देवनीस खेस्स जैसे डॉक्टरों की मेहनत और सोच ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो किसी भी क्षेत्र में बदलाव संभव है।
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