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Garhwa ( Nityanand Dubey) : कई बार पुलिस की वर्दी लोगों को सिर्फ एक सरकारी नौकरी लगती है। लेकिन सच ये है कि इस वर्दी के पीछे कई ऐसे चेहरे होते हैं, जो रोज घर से निकलते वक्त ये नहीं जानते कि आज लौटकर आएंगे भी या नहीं। गढ़वा में सोमवार को कुछ ऐसे ही जांबाज पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना हथियारबंद अपराधियों को पकड़कर एक बड़ी वारदात को टाल दिया। यह कोई साधारण सम्मान समारोह नहीं था। यह उन जवानों के हौसले का सम्मान था, जो हर दिन दूसरों की सुरक्षा के लिए खुद को खतरे में डाल देते हैं।
मंच छोटा था, लेकिन जज्बा बड़ा था
गढ़वा नगर थाना परिसर में जब नगर थानेदार इंस्पेक्टर सुनील कुमार तिवारी ने जवानों को शॉल ओढ़ाकर माला पहनाई, तो माहौल में गर्व साफ दिख रहा था। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन उस मुस्कान के पीछे कई रातों की ड्यूटी, कई बार की भागदौड़ और कई बार मौत को बेहद करीब से देखने का अनुभव छुपा था। यह सम्मान उन जवानों के लिए था, जिन्होंने सिर्फ अपराधियों को नहीं पकड़ा, बल्कि शहर के लोगों को एक बड़ी अनहोनी से बचाया।
वो रात, जब टाइगर मोबाइल ने खतरे को पहले ही भांप लिया
24 मार्च 2026 की रात गढ़वा शहर में सब कुछ सामान्य लग रहा था। लोग अपने घरों में थे, बाजार बंद हो चुके थे। लेकिन शहर की गलियों में टाइगर मोबाइल की टीम अपनी ड्यूटी पर थी। इसी दौरान एएसआई नंद गोपाल राम और आरक्षी 186 भाष्कर कुमार पाठक (टाइगर 03) को दो संदिग्ध युवक दिखाई दिए। दोनों का हावभाव सामान्य नहीं था। पुलिस ने बिना समय गंवाए उन्हें रोका और तलाशी ली। तलाशी के दौरान जो सामने आया, उसने पुलिस की आशंका को सच साबित कर दिया। दोनों के पास से अवैध हथियार और जिंदा गोलियां बरामद हुए। पूछताछ में उनकी पहचान अजित कुमार उर्फ छोटू और आदित्य कुमार के रूप में हुई। कहा जा रहा है कि दोनों किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। लेकिन पुलिस की सतर्कता ने उस साजिश को वहीं खत्म कर दिया।
एक पल की देर होती, तो कहानी कुछ और होती
अपराधियों के पास हथियार था। गोली चल सकती थी। भागने की कोशिश हो सकती थी। लेकिन जवानों ने न घबराहट दिखाई, न पीछे हटे। यही पुलिसिंग का सबसे कठिन हिस्सा है। मौके पर फैसला लेना पड़ता है। सामने अपराधी हो, हथियार हो और आसपास आम लोग हों, तो हर सेकंड एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाता है। नंद गोपाल राम और भाष्कर पाठक ने उसी पल सही कदम उठाया और दो अपराधियों को दबोच लिया। शहर में एक बड़ी वारदात होने से पहले ही खतरे को रोक दिया गया।
गोली चलाकर भागा अपराधी, लेकिन पुलिस की पकड़ से बच नहीं सका
इसके कुछ दिन बाद 28 मार्च 2026 को नगर ऊंटारी थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति को गोली मारकर अपराधी फरार हो गया। गोली चलने की खबर सुनते ही इलाके में हड़कंप मच गया। लोग डर गए, अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लेकिन इसी बीच पुलिस की PCR टीम ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। PCR चार्ली 05 की टीम ने बिना देर किए अपराधी का पीछा शुरू किया। रास्ते आसान नहीं थे। अपराधी के हाथ में हथियार होने की आशंका थी और खतरा लगातार बना हुआ था। लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं छोड़ी।
पीछा कर अपराधी को पकड़ने वाले पुलिसकर्मियों में शामिल थे :
- एएसआई अरुण कुमार यादव
- हवलदार जयनाथ मांझी
- आरक्षी 337 मो. अनीस मंसूरी
- चालक आरक्षी 804 जयशंकर प्रसाद
पुलिस के मुताबिक, अगर अपराधी भागने में सफल हो जाता, तो इलाके में दहशत और बढ़ जाती और आगे भी अपराध की घटनाएं हो सकती थीं।
पुलिस की जीत, लेकिन ये जीत आसान नहीं होती
जब कोई अपराधी पकड़ा जाता है, तो खबर में सिर्फ गिरफ्तारी की लाइनें छपती हैं। लेकिन उस गिरफ्तारी के पीछे कई मुश्किलें होती हैं। रात की ड्यूटी, लगातार भागदौड़, तनाव, परिवार की चिंता और हर समय ये डर कि कहीं कोई हमला न हो जाए। इसके बावजूद जवान अपना काम करते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि अगर वे पीछे हट गए, तो आम लोग असुरक्षित हो जाएंगे। इस सम्मान समारोह में यही संदेश साफ दिखा कि गढ़वा पुलिस अपने जवानों की मेहनत और बहादुरी को नजरअंदाज नहीं कर रही।
थानेदार बोले, ऐसे सम्मान से बढ़ता है भरोसा
नगर थाना प्रभारी सुनील कुमार तिवारी ने जवानों को सम्मानित करते हुए कहा कि ये पुलिस विभाग के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा, “इन जवानों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना अपराधियों का सामना किया। इस तरह के सम्मान से पूरी टीम का मनोबल बढ़ता है और समाज में पुलिस के प्रति विश्वास और सुदृढ़ होता है।” उनकी बातों में एक साफ संदेश था कि पुलिस का काम सिर्फ केस बनाना नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी बचाना भी है।
सम्मान सिर्फ माला नहीं, जिम्मेदारी का एहसास भी है
समारोह के दौरान मौजूद दूसरे पुलिसकर्मियों ने भी अपने साथियों की पीठ थपथपाई। माहौल में अपनापन था। यह एक तरह से पुलिस परिवार का वो पल था, जहां हर कोई जानता था कि आज जिन जवानों को सम्मान मिला है, कल यही जिम्मेदारी किसी और की भी हो सकती है। क्योंकि पुलिस की नौकरी में हर दिन एक नई चुनौती होती है।
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