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Ranchi : राजधानी रांची के नामकुम थाना क्षेत्र में पुलिस ने जिस तस्करी गिरोह पर शिकंजा कसा है, वह कोई मामूली मामला नहीं, बल्कि झारखंड में नशे के कारोबार का एक ऐसा खतरनाक नेटवर्क है, जो रांची से निकलकर खूंटी और हजारीबाग तक अपनी जड़ें फैला चुका था। पुलिस जांच में जो बातें सामने आई हैं, उससे साफ है कि यह गिरोह पूरी प्लानिंग के साथ अफीम और डोडा की खरीद-बिक्री कर रहा था और हर कदम पर कानून को चकमा देने की तैयारी पहले से रहती थी।
आरोपी मनीष तिर्की की गिरफ्तारी के बाद जो खुलासा हुआ, वह डराने वाला है। करीब 26 साल के मनीष तिर्की ने खुद कबूल किया कि उसने इस धंधे के लिए बाकायदा एक गिरोह खड़ा किया, जिसमें अलग-अलग जिलों के लोग शामिल थे। यह गिरोह नशे के सामान को लोकल मार्केट से उठाता, फिर उसे सुरक्षित ठिकानों पर जमा करता और बाद में अलग-अलग जिलों में सप्लाई कर देता।
गिरोह का सिस्टम ऐसा, जैसे कोई कंपनी चल रही हो
रांची के रूरल एसपी प्रवीण पुष्कर के मुताबिक यह गिरोह किसी सामान्य तस्करी की तरह नहीं चलता था। इनके पास काम बांटा हुआ था। कोई माल खरीदने का काम करता था, कोई पैकेजिंग और छिपाने का, कोई डिलीवरी देने का, तो कोई पैसों का हिसाब संभालता था। मतलब साफ है… यह गिरोह नशे का धंधा नहीं, बल्कि एक पूरा संगठित ‘काला बिजनेस मॉडल’ चला रहा था।
गांवों से उठता था माल, शहरों में पहुंचता था जहर
पुलिस के शिकंजे में आए आरोपी मनीष तिर्की ने खुलासा किया कि गिरोह के लोग स्थानीय स्तर पर डोडा और अफीम खरीदते थे। शुरुआत छोटे लेवल पर होती थी ताकि किसी को शक न हो। फिर धीरे-धीरे बड़ी खेप तैयार कर उसे दूसरे जिलों में सप्लाई किया जाता था। पुलिस को शक है कि यह सप्लाई सिर्फ खूंटी और हजारीबाग तक सीमित नहीं थी। नेटवर्क के तार और भी जिलों तक फैले हो सकते हैं।
नकद नहीं, डिजिटल ट्रांजेक्शन से चलता था खेल
इस केस में सबसे बड़ा और खतरनाक पहलू यह है कि गिरोह सिर्फ नकद पैसे से काम नहीं करता था। आरोपी ने साफ बताया कि लेन-देन डिजिटल माध्यम से भी होता था। यानी नशे के इस नेटवर्क ने तकनीक को हथियार बना लिया था। मोबाइल ट्रांजेक्शन, ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल हिसाब-किताब से वे खुद को सुरक्षित समझ रहे थे। अब पुलिस डिजिटल पेमेंट के जरिए जुड़े नंबरों, खातों और ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की जांच में जुट गई है। यह जांच आगे चलकर कई बड़े नामों तक पहुंच सकती है।
कई चारपहिया गाड़ियों से होती थी सप्लाई, रूट बदलकर चलता था धंधा
एसपी प्रवीण पुष्कर ने बताया कि आरोपी ने कबूल किया है कि गिरोह के पास कई चारपहिया वाहन हैं। इन्हीं गाड़ियों से नशे के सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता था। यह गिरोह हर बार एक ही रास्ता नहीं अपनाता था। रास्ते बदलकर, वाहन बदलकर और समय बदलकर सप्लाई की जाती थी ताकि पुलिस को भनक तक न लगे। पुलिस को शक है कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल पहले भी कई बार बड़ी खेप भेजने में हुआ है।
जब्त माल की कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश
पुलिस ने छापेमारी के दौरान घर से अलग-अलग रंग के प्लास्टिक बोरे में भरा हुआ 31 बोरा डोडा बरामद किया। इसके अलावा मकान परिसर में खड़ी सफेद रंग की महिन्द्रा बोलेरो की तलाशी लेने पर उसमें भी 4 प्लास्टिक बोरे डोडा मिला। बरामद डोडा का कुल वजन 566.5 किलोग्राम पाया गया। पुलिस ने घर के अंदर रखी अलमारी की तलाशी ली, जहां से 700 ग्राम अफीम बरामद किया गया। इसके साथ ही अफीम तौलने में इस्तेमाल होने वाली डिजिटल मशीन, 2 लाख 28 हजार रुपये नकद, बैंक पासबुक और एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी जब्त किया गया।
डोडा की अनुमानित कीमत 84 लाख 97 हजार 500 रुपये बताई है। वहीं जब्त अफीम की अनुमानित कीमत करीब 3 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है। मतलब साफ है… यह सिर्फ तस्करी नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों का ऐसा कारोबार था, जो युवाओं की जिंदगी को धीरे-धीरे बर्बाद कर रहा था। इतनी बड़ी मात्रा में माल का पकड़ा जाना इस बात का सबूत है कि गिरोह का नेटवर्क काफी मजबूत था और लगातार सप्लाई हो रही थी।
पुलिस के हाथ लगा बड़ा सुराग, अब नेटवर्क में मचेगी खलबली
नामकुम थाना में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की टीम लगातार छापेमारी कर रही है। अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह माल कहां से आ रहा था, किसके संरक्षण में यह धंधा फल-फूल रहा था, कौन लोग खरीददार थे और कौन है इस नेटवर्क का असली सरगना? पुलिस मान रही है कि आरोपी सिर्फ एक मोहरा हो सकता है। इसके पीछे बड़े चेहरे और बड़ा नेटवर्क छिपा हो सकता है।
अब गिरफ्तारी की आंधी तय, कई चेहरे होंगे बेनकाब
पुलिस की कार्रवाई से गिरोह में हड़कंप मचा हुआ है। कई लोग अंडरग्राउंड होने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन पुलिस का कहना है कि छापेमारी जारी है और बाकी आरोपियों को जल्द दबोचा जाएगा। आज की उम्दा कामयाबी को हासिल करने के लिए एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर रूरल एसपी प्रवीण पुष्कर की देखरेख में टीम गठित की गई थी। सीनियर डीएसपी अमर पांडेय, नामकुम थानेदार इंस्पेक्टर रामनारायण सिंह, एसआई शशि रंजन, धर्मेन्द्र कुमार, जयदेव कुमार सराक, एएसआई संतोष कुमार, जयप्रकाश कुमार, उज्जवल कुमार सिंह, तारकेश्वर प्रसाद केशरी और देवेन्द्र कुमार सिंह इस टीम का हिस्सा थे।
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