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Palamu : पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र के पनेरीबांध गांव में सोमवार की रात भी बाकी दिनों जैसी ही थी। दिनभर की थकान के बाद दिलीप पाठक का परिवार चैन की नींद सो रहा था। घर के कोने में मच्छर भगाने के लिए अगरबत्ती जल रही थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि यही छोटी सी चीज कुछ ही देर में पूरे घर को निगल जाएगी। रात करीब 10:30 बजे एक चिंगारी उठी और देखते ही देखते कंडी और बांस से बना कच्चा घर आग की लपटों में घिर गया। जब तक लोगों की नींद खुली, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
जान बची, पर सब कुछ चला गया
घर के अंदर सो रहे लोगों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। लेकिन पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत किसी में नहीं थी। घर में रखा हर सामान आग के हवाले हो चुका था। कपड़े, अनाज, फर्नीचर, जेवर, यहां तक कि नकद पैसे भी जल गए। गांव के लोग दौड़े, मोटर पंप चलाए गए, बाल्टी से पानी फेंका गया, लेकिन आग इतनी तेज थी कि किसी की एक नहीं चली। बाद में फायर ब्रिगेड पहुंची और करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझी, लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।
सुबह का मंजर… आंखों में सिर्फ आंसू
मंगलवार की सुबह जब दिलीप पाठक और उनकी पत्नी गांव पहुंचे, तो सामने अपना घर नहीं, राख का ढेर था। जो घर कभी बच्चों की हंसी से गूंजता था, वहां सन्नाटा पसरा था। दिलीप पाठक की आंखों में आंसू थे। उन्होंने बताया कि घर में एक नातिन की शादी की तैयारी चल रही थी। सगाई होने वाली थी। कपड़े खरीदे गए थे, जेवर बनवाए गए थे, घर में खुशियों का माहौल था। लेकिन अब सब कुछ जलकर खाक हो गया।
पांच बेटियों का सहारा, खुद बेघर
दिलीप पाठक की पांच बेटियां हैं। इसी घर में दो बेटियां अपने परिवार के साथ रहती थीं। अब पूरा परिवार एक झटके में बेघर हो गया है। जिन बेटियों के लिए पिता ने उम्र भर मेहनत की, आज वही बेटियां उन्हें अपने घर में शरण दे रही हैं। गांव के लोग मदद के लिए आगे आ रहे हैं, लेकिन जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई आसान नहीं है।
खुशियों की जगह छाया मातम
जिस घर में शादी की तैयारी थी, वहां अब सन्नाटा है। जहां गहनों की चमक थी, वहां राख बिखरी है। जहां मेहमानों के स्वागत की तैयारी थी, वहां अब आंसुओं का सैलाब है। फिलहाल दिलीप पाठक और उनका परिवार अपनी बेटी के घर में रह रहा है। सिर पर छत नहीं, भविष्य अनिश्चित है, लेकिन जिंदा रहने की उम्मीद अब भी बाकी है।
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