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Jamtara (Vijay Kumar) : झारखंड के जामताड़ा जिले का छोटा सा गांव ताराबाद आज गर्व से भरा हुआ है। वजह है यहां की बेटी देवाशी हेम्ब्रम, जिसने अपनी मेहनत और लगन से अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर दिया है। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित तीसरे भारत-थाईलैंड अंतरराष्ट्रीय राइफल शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में देवाशी ने स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि सपने अगर सच्चे हों तो हालात कभी रुकावट नहीं बनते।
गांव की साधारण शुरुआत, असाधारण हौसले की कहानी
ताराबाद गांव की गलियों में पली-बढ़ी देवाशी का बचपन किसी बड़े खेल मैदान या आधुनिक सुविधाओं के बीच नहीं बीता। घर की आर्थिक स्थिति सीमित थी। पिता सुधीर हेम्ब्रम किसान हैं और खेतों की मेहनत से ही परिवार का जीवन चलता है। लेकिन देवाशी के भीतर कुछ अलग करने की चाह बचपन से ही थी। गांव के लोग बताते हैं कि वह छोटी उम्र से ही फोकस और धैर्य वाली बच्ची थी। जब बाकी बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते थे, देवाशी का ध्यान अपने लक्ष्य पर होता था।
संसाधन कम, पर हौसला बुलंद
शूटिंग जैसा खेल, जिसमें तकनीक, ट्रेनिंग और उपकरणों की जरूरत होती है, उसे अपनाना किसी ग्रामीण लड़की के लिए आसान नहीं था। लेकिन देवाशी ने हालात को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। पिता सुधीर हेम्ब्रम ने भी बेटी के सपनों को पंख देने में कोई कमी नहीं छोड़ी। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने हर संभव कोशिश की कि देवाशी को आगे बढ़ने का मौका मिले। कई बार मुश्किलें आईं, लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी।
बैंकॉक में चमकी देवाशी की निशानेबाजी
थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत और थाईलैंड के कई अनुभवी निशानेबाज शामिल थे। माहौल दबाव भरा था, लेकिन देवाशी ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित कर दिया। हर राउंड में उनका निशाना सटीक बैठता गया और आखिरकार उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, भारतीय टीम में खुशी की लहर दौड़ गई और गांव में भी खबर पहुंचते ही जश्न शुरू हो गया।
घर में खुशी के आंसू, गांव में गर्व का माहौल
देवाशी की जीत की खबर जैसे ही ताराबाद गांव पहुंची, पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया। पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा कि बेटी ने उनके सारे संघर्षों को आज सम्मान में बदल दिया है। गांव के लोग एक दूसरे को मिठाई खिलाते नजर आए। हर कोई यही कह रहा था कि देवाशी ने गांव का नाम दुनिया के नक्शे पर रोशन कर दिया है।
बेटियों के लिए नई उम्मीद की किरण
देवाशी की सफलता अब सिर्फ एक पदक की कहानी नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीण भारत की लड़कियों के लिए एक नई प्रेरणा बन गई है। लोग कह रहे हैं कि अगर सही दिशा और समर्थन मिले, तो गांव की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमका सकती हैं। स्थानीय युवाओं और खासकर लड़कियों में अब खेलों के प्रति नया उत्साह देखने को मिल रहा है।
आगे की राह और बड़े सपने
देवाशी की नजर अब और बड़े मंचों पर है। उनका सपना सिर्फ यही नहीं है कि वह देश के लिए पदक जीतें, बल्कि वह चाहती हैं कि आने वाली पीढ़ी की लड़कियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिले।
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