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Patna : पटना की एक सामान्य सी सुबह मंगलवार को उस वक्त खास बन गई जब डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पहुंचे। यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि राज्य के पशुपालन क्षेत्र की दिशा और दशा को समझने और उसे नई गति देने की कोशिश के तौर पर देखा गया। विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचते ही माहौल में एक अलग ही हलचल दिखी। कुलपति डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने मंत्री का पौधा भेंट कर स्वागत किया। यह स्वागत औपचारिक जरूर था, लेकिन बातचीत में जमीन से जुड़ी चुनौतियों और संभावनाओं की झलक साफ दिख रही थी।
कक्षाओं से लेकर प्रयोगशालाओं तक की झलक
मंत्री ने विश्वविद्यालय में चल रहे शिक्षण और शोध कार्यों की जानकारी ली। वैज्ञानिकों ने उन्हें बताया कि यहां सिर्फ पढ़ाई नहीं होती, बल्कि पशुओं के स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण और बेहतर नस्ल विकसित करने पर लगातार काम चल रहा है। टीकाकरण अभियान, पशु स्वास्थ्य जांच शिविर और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे प्रसार कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि कोशिश यह है कि वैज्ञानिक शोध सीधे पशुपालकों के जीवन से जुड़ सके। इसी दौरान विश्वविद्यालय के कुछ अनोखे प्रयोग भी चर्चा में आए, जिनमें बटेर लिट्टी, चिकेन लिट्टी और व्हे सूप जैसे उत्पाद शामिल हैं। यह बताता है कि यहां शोध सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यावहारिक उपयोग की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

गांव की अर्थव्यवस्था से जुड़ी उम्मीदें
बैठक के दौरान मंत्री नंदकिशोर राम ने साफ कहा कि बिहार की असली ताकत गांवों में है और पशुपालन इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर सही तरीके से काम किया जाए तो यह क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन सकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों को राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाने वाला बताते हुए कहा कि उनका शोध सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर खेत और खलिहान तक दिखना चाहिए।
गौवंश से लेकर भैंस पालन तक नई योजना की दिशा
मंत्री ने बैठक में यह भी कहा कि सरकार पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। गौवंश के साथ-साथ भैंस पालन को भी बढ़ावा देने की योजना पर जोर दिया गया। विशेष रूप से मुर्रा नस्ल के विकास को लेकर चर्चा हुई, जिसे अधिक दूध उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में दो नए पशु विज्ञान महाविद्यालय खोलने की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है।
पशु प्रक्षेत्र में उतरकर देखी हकीकत
बैठक के बाद मंत्री सीधे विश्वविद्यालय के पशु प्रक्षेत्र परिसर पहुंचे। यहां उन्होंने देशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों को करीब से देखा। गाय और भैंसों की देखभाल, उनके स्वास्थ्य प्रबंधन और नस्ल सुधार की गतिविधियों को देखकर उन्होंने संतोष जताया। उन्होंने कहा कि यह काम अगर और मजबूत तरीके से आगे बढ़े तो बिहार पशुपालन में देश में एक मजबूत पहचान बना सकता है।
सरकार और संस्थान के बीच साझेदारी पर जोर
अपने दौरे के अंत में मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार और विश्वविद्यालय अगर एक साथ मिलकर काम करें तो बदलाव तेज होगा। उन्होंने कहा कि योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनका लाभ सीधे पशुपालकों तक पहुंचेगा। इस मौके पर विभाग और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।
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