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Ranchi : गोमिया के पूर्व विधायक और झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह के निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर है। सीएम हेमंत सोरेन ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए उन्हें जनसेवा के लिए समर्पित नेता बताया है। सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक संदेश जारी कर कहा कि माधव लाल सिंह का निधन बेहद दुखद है और यह सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। सीएम हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में लिखा कि माधव लाल सिंह ने एकीकृत बिहार सरकार से लेकर झारखंड राज्य गठन के बाद तक लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहकर समाज और जनता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने मरांग बुरु से दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की।
राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराया जाए। सरकार के इस फैसले से उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों के बीच भावुक माहौल है। माना जा रहा है कि यह सम्मान उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक योगदान और जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए दिया गया है।
पूर्व मंत्री स्व श्री माधव लाल सिंह जी का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है।
दिवंगत आत्मा को शत-शत नमन! https://t.co/DF0o7EkPCb— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) May 13, 2026
गोमिया की राजनीति का बड़ा चेहरा थे माधव लाल सिंह
माधव लाल सिंह झारखंड और पहले के एकीकृत बिहार की राजनीति का जाना-पहचाना नाम थे। उन्होंने गोमिया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और मंत्री के रूप में भी अहम जिम्मेदारियां निभाईं। क्षेत्र में उनकी पहचान ऐसे नेता की थी, जो लोगों की समस्याएं सुनते थे और उन्हें उठाने में सक्रिय रहते थे। गोमिया और आसपास के इलाकों में उनका अच्छा जनाधार माना जाता था। आम लोगों के बीच उनकी पहुंच और सहज व्यवहार ने उन्हें एक जननेता की पहचान दिलाई थी।
राजनीतिक गलियारों में शोक, समर्थकों में मायूसी
माधव लाल सिंह के निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक गलियारों में शोक का माहौल बन गया। कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। गोमिया समेत आसपास के क्षेत्रों में उनके समर्थकों के बीच गम का माहौल है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि माधव लाल सिंह का जाना झारखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहकर अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनके निधन के साथ झारखंड की राजनीति का एक अनुभवी अध्याय खत्म हो गया।
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