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Ranchi : सरकारी दफ्तरों के बारे में आम लोगों के मन में अक्सर एक तस्वीर बनी रहती है। लंबी कतारें, फाइलों का इंतजार, चक्कर पर चक्कर और अधिकारियों तक पहुंचने की मुश्किल। लेकिन रांची समाहरणालय में घटी एक घटना ने इस धारणा को कुछ देर के लिए बदल दिया। दोपहर का वक्त था। तारीख 16 मई। रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री अपने दफ्तर से एक मीटिंग के लिए सभागार की ओर जा रहे थे। दफ्तर की भागदौड़ के बीच उनकी नजर दरवाजे पर खड़े एक बुजुर्ग पर पड़ी। सफेद बाल, थका हुआ चेहरा और आंखों में उम्मीद लिए 85 वर्षीय राधेश्याम नाथ काफी देर से वहीं इंतजार कर रहे थे। डीसी ने अपने बढ़ते कदम रोके। बुजुर्ग को अंदर बुलाया। कुर्सी दी, पानी मंगवाया और बेहद सहज अंदाज में पूछा, “बताइए बाबा, क्या परेशानी है?” यह कोई लंबा संवाद नहीं था, लेकिन उसमें एक अपनापन था।
“बाबू, पेंशन और इलाज का सहारा चाहिए…”
किशोरगंज निवासी राधेश्याम नाथ ने धीमी आवाज में अपनी परेशानी बताई। उन्हें वृद्धा पेंशन की जरूरत थी। साथ ही आयुष्मान कार्ड भी नहीं बन पाया था। उम्र के इस पड़ाव पर इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सरकारी योजनाओं का सहारा ही उनके लिए सबसे बड़ी उम्मीद था। बुजुर्ग की बातें सुनते हुए डीसी मंजूनाथ भजंत्री सिर्फ एक अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि घर के किसी बड़े बेटे की तरह नजर आए। उन्होंने दस्तावेज देखे। फिर खुद ही पासबुक और आधार कार्ड की फोटोकॉपी करने लगे। दफ्तर में मौजूद लोग भी यह सबकुछ देखकर कुछ देर के लिए ठिठक गए। अक्सर अधिकारी निर्देश देते हैं, लेकिन यहां डीसी खुद एक बुजुर्ग की मदद में जुटे थे।

एक आशीर्वाद, जिसने सबका ध्यान खींच लिया
जब डीसी ने राधेश्याम नाथ को भरोसा दिलाया कि जल्द ही उन्हें दोनों योजनाओं का लाभ मिलेगा, तब बुजुर्ग की आंखों में चमक लौट आई। वे उठे। धीरे से डीसी भजंत्री के सिर पर हाथ रखा और भावुक होकर हौले से कहा- “भला हो बाबू आपका…” यह सिर्फ एक वाक्य नहीं था। यह उस भरोसे की आवाज थी, जो आम आदमी किसी संवेदनशील अधिकारी में ढूंढता है। दफ्तर में मौजूद कई लोगों के लिए यह पल बेहद भावुक था। एक तरफ जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी था, दूसरी तरफ जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर खड़ा एक बुजुर्ग, जिसे सिर्फ थोड़ी संवेदनशीलता और सम्मान की जरूरत थी।

आदेश नहीं, तुरंत कार्रवाई
इस मुलाकात के बाद मामला फाइलों में दबा नहीं रहा। डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिया कि राधेश्याम नाथ को योजनाओं का लाभ जल्द से जल्द दिलाया जाए। अगले ही दिन शहर के सीओ यानी अंचल अधिकारी खुद बुजुर्ग के घर पहुंचे। वहां सीओ ने बुजुर्ग को सर्वजन पेंशन योजना का स्वीकृति पत्र और आयुष्मान कार्ड सौंपा। सिर्फ 24 घंटे के भीतर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल जाना राधेश्याम नाथ के लिए किसी बड़े राहत से कम नहीं था। बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब उन्हें इलाज और खर्च की चिंता थोड़ी कम हो गई है।

इसलिए अलग माने जाते हैं मंजूनाथ भजंत्री
प्रशासनिक गलियारों में मंजूनाथ भजंत्री को एक एक्टिव और संवेदनशील अधिकारी के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि फेम इंडिया मैगजीन और एशिया पोस्ट की ओर से जारी सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026 सर्वेक्षण की प्राथमिक सूची में भी उनका नाम शामिल किया गया है। इस सर्वे में देशभर के करीब 800 जिलों में कार्यरत अधिकारियों के कामकाज का अध्ययन किया गया। बेहतर प्रशासन, जनसरोकार, संकट प्रबंधन, नवाचार और जनता के बीच सक्रिय भागीदारी जैसे कई मानकों के आधार पर अधिकारियों का चयन किया गया। सूची में राजस्थान की चर्चित आईएएस अधिकारी टीना डाबी समेत कई राज्यों के जिलाधिकारियों को जगह मिली है।
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