अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के बड़ा चटकम के घने जंगल में पड़े सड़े-गले शव को देखकर किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि इसके पीछे एक मामूली बहस इतनी भयावह हत्या में बदल गई होगी। जंगल की खामोशी में दबी इस कहानी का सच जब सामने आया तो हर कोई हैरान रह गया। शराब की महफिल में शुरू हुई कहासुनी कुछ ही मिनटों में खून-खराबे तक पहुंच गई और एक शख्स की जान चली गई। पाकुड़ पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर इस ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझाकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार हत्या किसी पुरानी दुश्मनी या बड़ी साजिश का नतीजा नहीं थी, बल्कि शराब के नशे में अपशब्द के चलते हुए लफड़े का अंजाम था।
जंगल में मिला शव, इलाके में फैल गई थी दहशत
28 मई की सुबह बड़ा चटकम गांव के जंगल में ग्रामीणों की नजर एक शव पर पड़ी। शव बुरी तरह सड़ चुका था और पहचानना लगभग असंभव था। खबर मिलते ही सिमलौंग ओपी और लिट्टीपाड़ा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। जंगल के बीच पड़े शव को देखकर पुलिस भी समझ गई कि मामला साधारण नहीं है। शव की हालत ऐसी थी कि पहचान करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मामला दर्ज किया गया और एसपी अनुदीप सिंह ने एसआईटी का गठन कर दिया।
पहचान बनी जांच की पहली बड़ी कड़ी
जांच टीम के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर मृतक कौन है? कई स्तरों पर पड़ताल, स्थानीय लोगों से पूछताछ और तकनीकी मदद के बाद पुलिस ने शव की पहचान गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी थाना क्षेत्र के राजाभीठा गांव निवासी 35 वर्षीय सुनील पहाड़िया के रूप में की। जैसे ही मृतक की पहचान हुई, जांच की दिशा बदल गई। पुलिस ने सुनील के अंतिम दिनों की गतिविधियों, उसके संपर्कों और उन लोगों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी, जिनके साथ उसे आखिरी बार देखा गया था।
मुखबिर की सूचना ने खोला हत्या का राज
एसआईटी लगातार इलाके में छापेमारी कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं मिलीं। तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय मुखबिरों से मिली जानकारी को जोड़ने पर शक की सुई बड़ा चटकम गांव के दो युवकों पर जाकर टिक गई। पुलिस ने 28 साल के जलिया पहाड़िया और 30 साल के धर्मा पहाड़िया को उठा लिया। शुरुआत में दोनों ने खुद को बेगुनाह बताया, लेकिन जब पुलिस ने एक-एक साक्ष्य उनके सामने रखा तो दोनों टूट गए। पूछताछ के दौरान उन्होंने जो कहानी बताई, उसने पूरे मामले का रहस्य खोल दिया।
एक अपशब्द बना मौत की वजह
पुलिस के अनुसार घटना वाली रात सुनील पहाड़िया, जलिया पहाड़िया और धर्मा पहाड़िया एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। बातचीत चल रही थी और नशा भी चढ़ रहा था। इसी दौरान सुनील के मुख से उनकी एक परिचित महिला के बारे में अपशब्द निकल गया। यह बात जलिया और धर्मा को बेहद नागवार गुजरी। पहले बहस हुई, फिर गाली-गलौज शुरू हुई और देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया। नशे में धुत तीनों लोगों के बीच लफड़ा इतना बढ़ गया कि जलिया और धर्मा ने पास पड़ा भारी पत्थर उठा लिया। आरोप है कि दोनों ने मिलकर सुनील पर लगातार वार किये। सिर और शरीर पर पत्थर से किये गये हमले इतने गंभीर थे कि मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
हत्या के बाद जंगल में छोड़ दिया शव
हत्या करने के बाद दोनों आरोपियों ने शव को जंगल में ही छोड़ दिया और वहां से फरार हो गए। उन्हें लगा कि घने जंगल में पड़ा शव शायद कभी पहचान में नहीं आएगा और मामला हमेशा के लिए दब जाएगा। लेकिन पुलिस की जांच ने उनकी इस सोच को गलत साबित कर दिया।
पत्थर बना सबसे बड़ा सबूत
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों ने पुलिस को घटनास्थल की पूरी जानकारी दी। उनकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया पत्थर भी बरामद कर लिया गया। पुलिस का मानना है कि यही वह पत्थर है जिससे सुनील पहाड़िया पर जानलेवा हमला किया गया था। बरामद पत्थर को जब्त कर वैज्ञानिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
48 घंटे में पुलिस ने सुलझाई गुत्थी
पाकुड़ पुलिस के लिए यह मामला आसान नहीं था। एक अज्ञात और सड़ा-गला शव, कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं और जंगल के बीच घटनास्थल। इसके बावजूद एसआईटी ने लगातार मेहनत कर महज 48 घंटे में पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।
जंगल में मिली सड़ी-गली लाश, पुलिस के सामने थी ब्लाइंड मर्डर की चुनौती। लेकिन पाकुड़ पुलिस ने महज 48 घंटे में हत्या की गुत्थी सुलझा दी। SP अनुदीप सिंह खोल गए पूरा राज…#Pakur #Jharkhand #CrimeNews #PakurPolice #BreakingNews #NewsSamvad #TodayNews #LatestNews #TrendingNews pic.twitter.com/UUEno0Lul1
— News Samvad (@newssamvaad) May 31, 2026
इस ब्लाइंड को सुलझाने में एसडीपीओ कुमार गौरव के नेतृत्व में इंस्पेक्टर बाबूराम भगत, सिमलौंग ओपी प्रभारी बलवंत दूबे, दिलीप बास्की, मुन्ना प्रसाद, मृत्यंजय कुमार पाठक और सशस्त्र बल के जवानों की भूमिका सराहनीय रही।
इसे भी पढ़ें : रामगढ़ जेल में रेड, DC-SP के निर्देश पर खंगाला गया कोना-कोना

