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Home » जब महिलाओं ने संभाली कमान, राष्ट्रीय मंच पर चमका पाकुड़ का ये गांव
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जब महिलाओं ने संभाली कमान, राष्ट्रीय मंच पर चमका पाकुड़ का ये गांव

June 4, 2026No Comments4 Mins Read
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Pakur (Jaydev Kumar) : कभी गांवों की पहचान सिर्फ बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास की चुनौतियों से होती थी। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। झारखंड के पाकुड़ जिले की झिकरहट्टी पूर्वी पंचायत ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच मजबूत हो और विकास में लोगों की भागीदारी हो तो गांव भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। यही वजह है कि झिकरहट्टी पूर्वी पंचायत को “महिला हितैषी पंचायत” श्रेणी में पूरे देश में दूसरा स्थान मिला है। राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार के रूप में मिली यह उपलब्धि सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि गांव की उन महिलाओं की मेहनत और हौसले की पहचान है, जिन्होंने बदलाव की नई इबारत लिखी है।

गांव से दिल्ली तक पहुंची सफलता की गूंज

राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित समारोह में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और पंचायती राज राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने पंचायत के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। जैसे ही झिकरहट्टी पूर्वी पंचायत का नाम मंच से पुकारा गया, पूरे पाकुड़ जिले के लिए वह पल गर्व का बन गया। पुरस्कार ग्रहण करने वालों में जिला परिषद अध्यक्ष क्रिस्टमुनी हेंब्रम, उप विकास आयुक्त अरविंद कुमार लाल, जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक कुमार भगत, जिला पंचायत राज पदाधिकारी प्रीतिलता मुर्मू, मुखिया नरगिसा सुल्तान और पंचायत सचिव मो. मुस्तकिर शामिल थे।

जहां महिलाएं बनीं बदलाव की असली ताकत

झिकरहट्टी पूर्वी पंचायत की सबसे बड़ी ताकत यहां की महिलाएं हैं। पंचायत ने महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाकर नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें विकास की भागीदार बनाया। गांव की महिलाएं आज स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ रही हैं। पंचायत की बैठकों में उनकी भागीदारी बढ़ी है और कई सामाजिक मुद्दों पर वे खुलकर अपनी राय रख रही हैं। एक समय था जब कई महिलाएं घर की चौखट तक सीमित थीं। आज वही महिलाएं पंचायत की योजनाओं की निगरानी कर रही हैं, समूह चला रही हैं और गांव के विकास में अपनी भूमिका निभा रही हैं। यही बदलाव पंचायत की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

जनभागीदारी से बदली विकास की तस्वीर

किसी भी पंचायत का विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं होता, बल्कि लोगों की भागीदारी से होता है। झिकरहट्टी पूर्वी पंचायत ने इसी सिद्धांत पर काम किया। गांव में विकास योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाई गई। ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गईं और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में अब लोगों की आवाज सुनी जाती है। योजनाओं के चयन से लेकर उनके क्रियान्वयन तक स्थानीय लोगों को शामिल किया जाता है। यही वजह है कि गांव में विकास कार्यों का असर भी साफ दिखाई देता है।

सुशासन बना पहचान का आधार

राष्ट्रीय पुरस्कार पाने के पीछे पंचायत की बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था भी एक बड़ा कारण रही। पंचायत स्तर पर योजनाओं की नियमित निगरानी, समय पर कार्यों का निष्पादन और लोगों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता में रखा गया। सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने और जरूरतमंद लोगों तक उनका लाभ पहुंचाने के लिए पंचायत ने लगातार प्रयास किए। यही कारण है कि पंचायत की कार्यशैली को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।

डीसी ने बताया पूरे जिले का गौरव

पाकुड़ की डीसी मेघा भारद्वाज ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे जिले और झारखंड के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने पंचायत के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीणों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता बताती है कि गांवों में भी बदलाव की बड़ी कहानियां लिखी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि जिले की पंचायतें महिला सशक्तिकरण, जनभागीदारी और सतत विकास के क्षेत्र में लगातार बेहतर काम कर रही हैं। झिकरहट्टी पूर्वी पंचायत की उपलब्धि अन्य पंचायतों को भी प्रेरित करेगी।

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