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Home » गांव की बगिया से लंदन-दुबई तक, सीएम हेमंत के विजन ने लिख डाली नई इबारत
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गांव की बगिया से लंदन-दुबई तक, सीएम हेमंत के विजन ने लिख डाली नई इबारत

June 17, 2026No Comments5 Mins Read
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सीएम
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Ranchi : किसी भी सरकार की सफलता का असली पैमाना सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं होता, बल्कि यह होता है कि उन योजनाओं का असर गांवों और आम लोगों की जिंदगी में कितना दिखाई देता है। झारखंड में आज आम की खेती से जुड़ी जो नई तस्वीर सामने आ रही है, वह सीएम हेमंत सोरेन के उसी विज़न का नतीजा है, जिसमें ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने और खेती को बाजार से जोड़ने की सोच शामिल है। आज झारखंड के गांवों में सिर्फ आम नहीं उग रहे हैं, बल्कि नए सपने भी फल-फूल रहे हैं। गांव की महिलाएं, किसान और युवा मिलकर ऐसी कहानी लिख रहे हैं, जिसकी चर्चा अब देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच रही है। कभी स्थानीय बाजारों तक सीमित रहने वाला झारखंड का आम आज दुबई और लंदन के बाजारों में अपनी पहचान बना रहा है।

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एक सोच जिसने गांवों में पैदा की नई उम्मीद

कोरोना काल देश के लिए मुश्किल समय था। झारखंड भी इससे अछूता नहीं था। हजारों प्रवासी मजदूर अपने गांव लौट आए थे। रोजगार की चिंता हर परिवार के सामने थी। ऐसे समय में सीएम हेमंत सोरेन ने सिर्फ तत्काल राहत पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि भविष्य की आजीविका का रास्ता तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया। इसी सोच के साथ बिरसा हरित ग्राम योजना को आगे बढ़ाया गया। योजना का मकसद था कि गांव के लोगों को उनके घर के आसपास ही रोजगार मिले और खेती को आय का मजबूत जरिया बनाया जाए। आज उसके परिणाम जमीन पर साफ दिखाई दे रहे हैं। राज्य में करीब 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में आम के बगीचे विकसित हो चुके हैं। इन बागानों ने लगभग 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका का आधार दिया है।

महिलाओं को सिर्फ लाभार्थी नहीं, भागीदार बनाया गया

हेमंत सोरेन सरकार की ग्रामीण विकास योजनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि महिलाओं को केवल योजना का लाभ लेने वाला नहीं माना गया, बल्कि उन्हें बदलाव का नेतृत्व करने का अवसर दिया गया। सखी मंडल की हजारों दीदियां आज आम उत्पादन और विपणन की पूरी श्रृंखला की अहम कड़ी बन चुकी हैं। वे बागानों से आम संग्रह करती हैं, उनकी छंटाई करती हैं, गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में बांटती हैं, पैकेजिंग करती हैं और बिक्री तक की जिम्मेदारी संभालती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अब यह आम बात हो गई है कि महिलाएं बैठकों में बाजार की रणनीति पर चर्चा करती हैं, बिक्री के आंकड़े समझती हैं और कारोबार बढ़ाने की योजना बनाती हैं। यह बदलाव सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है।

गांव की बगिया से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक का सफर

झारखंड के आमों की बढ़ती पहचान इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा में किया गया प्रयास कितनी दूर तक असर डाल सकता है। इस वर्ष सिमडेगा जिले से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन भेजे गए हैं। वहीं रामगढ़ क्षेत्र से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई के बाजारों तक पहुंचे हैं। यह उपलब्धि सिर्फ निर्यात का आंकड़ा नहीं है। यह उन किसानों और महिलाओं के आत्मविश्वास की जीत है, जिन्होंने वर्षों तक सीमित संसाधनों में खेती की और अब उनके उत्पाद वैश्विक बाजारों में जगह बना रहे हैं।

‘पलाश’ बना ग्रामीण महिलाओं की मेहनत का ब्रांड

आज ‘पलाश’ केवल एक ब्रांड नहीं रह गया है। यह ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, उनकी लगन और उनकी आर्थिक ताकत का प्रतीक बन चुका है। पलाश ब्रांड के तहत आमों की खरीद, संग्रहण, पैकेजिंग और मार्केटिंग की पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संचालित की जा रही है। किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीओ को इससे जोड़ा गया है, ताकि किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके। आमों की गुणवत्ता के आधार पर उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले आम निर्यात और बड़े रिटेल नेटवर्क तक पहुंचते हैं, जबकि अन्य श्रेणियों के आमों को स्थानीय और क्षेत्रीय बाजारों में बेचा जाता है। इससे किसानों के उत्पाद का बेहतर उपयोग हो रहा है और नुकसान की संभावना कम हुई है।

लाखों का कारोबार, हजारों परिवारों को फायदा

राज्य में सक्रिय लगभग 115 किसान उत्पादक संगठन पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर्स से जुड़े हुए हैं। इनकी मदद से जिलेवार संग्रहण और बिक्री का नेटवर्क तैयार किया गया है। अब तक करीब 2240 क्विंटल आम की बिक्री हो चुकी है, जिससे 60.51 लाख रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। यह राशि सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पहुंच रही है और हजारों परिवारों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है।

अब और बड़े बाजारों की ओर कदम

हेमंत सोरेन सरकार की कोशिश सिर्फ उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। लक्ष्य यह भी है कि किसानों को ज्यादा से ज्यादा बाजार उपलब्ध कराया जाए। इसी दिशा में ब्लॉक और जिला स्तर पर किसान मेले, बायर-सेलर मीट और विपणन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे बड़े कॉर्पोरेट समूहों के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है। यदि यह साझेदारी आगे बढ़ती है तो झारखंड के किसानों और महिला समूहों को देश के बड़े उपभोक्ता बाजारों तक सीधी पहुंच मिल सकती है।

इसे भी पढ़ें : अंगदान से कई लोगों को मिल सकती है नई जिंदगी, जागरूकता जरूरी : सीएम हेमंत

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