अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : करीब पांच साल के लंबे इंतजार के बाद झारखंड राज्य सूचना आयोग एक बार फिर पूरी तरह काम करने की स्थिति में आ गया है। राज्य के नवनियुक्त चार सूचना आयुक्तों ने बुधवार को लोक भवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने लोक भवन के दरबार हॉल में आयोजित समारोह में सभी नए सूचना आयुक्तों को शपथ दिलाई। शपथ लेने वालों में वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा, झामुमो के पूर्व प्रवक्ता तनुज खत्री, भाजपा के पूर्व मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव अमूल नीरज खलखो शामिल हैं। इन नियुक्तियों के साथ ही लंबे समय से खाली पड़े सूचना आयुक्तों के पद भर गए हैं और आयोग में आम लोगों की सूचना से जुड़ी अपीलों और शिकायतों की सुनवाई फिर से नियमित रूप से शुरू हो सकेगी।

राज्य सरकार ने 10 जून को जारी की थी नियुक्ति की अधिसूचना
राज्य सरकार ने 10 जून को राज्यपाल की सशर्त मंजूरी मिलने के बाद चारों नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 25 मार्च को हुई चयन समिति की बैठक में इन नामों पर सहमति बनी थी। इसके बाद नियुक्ति से जुड़ी फाइल लोक भवन भेजी गई थी, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लग गया। राज्यपाल की ओर से कुछ सवाल उठाए जाने के बाद सरकार को चयन प्रक्रिया और उम्मीदवारों की योग्यता से जुड़े जवाब देने पड़े।
राज्यपाल ने उठाए थे निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया पर सवाल
सूचना आयोग जैसे अर्ध न्यायिक संस्थान में नियुक्ति को लेकर लोक भवन ने उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि, निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल पूछे थे। राज्यपाल ने सरकार से यह जानकारी मांगी थी कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों की योग्यता और स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता का किस आधार पर मूल्यांकन किया गया। सरकार ने जवाब में कहा था कि चयन समिति ने सूचना का अधिकार अधिनियम के नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई है। सरकार का कहना था कि जिन नामों की अनुशंसा की गई है, वे सभी कानून के प्रावधानों के अनुसार सही हैं। हालांकि, इसके बाद भी फाइल कुछ बिंदुओं पर दोबारा लौटाई गई। सरकार ने तीसरी बार उन्हीं नामों को मंजूरी के लिए भेजा, जिसके बाद राज्यपाल ने नियुक्ति को स्वीकृति दे दी।
नवंबर 2019 के बाद खाली था मुख्य सूचना आयुक्त का पद
झारखंड राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से पद खाली पड़े थे। मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल नवंबर 2019 में खत्म हो गया था। इसके बाद आयोग में मौजूद एकमात्र सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी को कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई थी। 8 मई 2020 को उनका कार्यकाल भी समाप्त हो गया। इसके बाद से आयोग में सूचना आयुक्त का कोई पद भरा नहीं था। करीब पांच साल तक आयोग के कामकाज पर इसका असर पड़ा और बड़ी संख्या में मामले लंबित होते गए।
सूचना आयुक्तों के लिए आए थे करीब 300 आवेदन
नियुक्ति प्रक्रिया में देरी के बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच सरकार ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। सूचना आयुक्त के पद के लिए करीब 300 आवेदन आए थे, जबकि मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए 35 से अधिक लोगों ने आवेदन किया था। हालांकि, चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बाद भी मुख्य सूचना आयुक्त का पद अभी खाली है। अब सभी की नजर इस पद पर होने वाली नियुक्ति पर है। चार नए सूचना आयुक्तों के आने से झारखंड राज्य सूचना आयोग के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है। खासकर सूचना के अधिकार कानून के तहत लंबित मामलों के निपटारे में अब गति आने की संभावना जताई जा रही है।
इसे भी पढ़ें : रात के सन्नाटे में ट्रक से टक’राई बस, जिंदा ज’ल गये 8 लोग

