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Patna : कहावत है कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो रास्ते की रुकावटें मायने नहीं रखतीं। लेकिन हकीकत यह भी है कि कई बार गरीबी और पैसों की तंगी इन हौसलों के पर कतर देती है। बिहार के पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के हजारों होनहार बच्चों की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही है, जहाँ टैलेंट की कमी नहीं थी, पर आगे बढ़ने के साधन नहीं थे। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। बिहार सरकार के पिछड़े वर्ग और अति पिछड़े वर्ग कल्याण विभाग की नीतियों ने इन युवाओं के सपनों को एक नई उड़ान दी है।
आज पटना के सूचना भवन स्थित ‘संवाद कक्ष’ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब विभाग की मंत्री रमा निषाद मीडिया के सामने आईं, तो उनके पास सिर्फ दावों की फेहरिस्त नहीं थी, बल्कि जमीन पर उतर चुकीं कामयाबियों के ठोस आंकड़े थे। उनके साथ विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार और अन्य आला अधिकारी भी मौजूद थे। मंत्री ने साफ लहजे में कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ कागजी मदद देना नहीं, बल्कि इन समाज के युवाओं को देश की सबसे बड़ी कुर्सियों पर बैठाना है।
जब कोचिंग की मोटी फीस नहीं बनी रुकावट, सिविल सेवा में दिखा दम
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की सबसे बड़ी और सुखद खबर सिविल सेवा से जुड़ी रही। ‘मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना’ के तहत जब कोई छात्र बीपीएससी या यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) पास करता है, तो उसे मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए क्रमशः 50,000 रुपये और 1,00,000 रुपये की एकमुश्त मदद सीधे उसके बैंक खाते में दी जाती है।
इस मदद का असर यह हुआ कि हाल ही में जारी हुए 70वीं बीपीएससी के फाइनल रिजल्ट में इस योजना का लाभ उठाने वाले 101 अभ्यर्थियों ने सफलता का परचम लहरा दिया। आज वे अफसर बनकर राज्य की सेवा करने के लिए तैयार हैं। अब तक 9,224 छात्र इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। अच्छी बात यह है कि अब इस योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें एसएससी, बैंकिंग, रेलवे और अन्य राज्यों की सिविल सेवा परीक्षाओं को भी शामिल कर लिया गया है, ताकि छोटे कस्बों के युवा भी बड़ी नौकरियों का सपना देख सकें।
स्कूल न छूटे, इसलिए दोगुनी हुई छात्रवृत्ति
अक्सर देखा जाता है कि गरीबी के कारण माता-पिता बच्चों को बीच में ही स्कूल से निकाल लेते हैं। इस ‘ड्रॉपआउट’ को रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत मिलने वाली सालाना राशि को दोगुना कर दिया गया है।
अब पहली से चौथी कक्षा के बच्चों को 1,200 रुपये, पांचवीं-छठी के बच्चों को 2,400 रुपये और सातवीं से दसवीं के बच्चों को 3,600 रुपये सालाना मिल रहे हैं। वहीं, जो बच्चे हॉस्टल में रहकर पढ़ रहे हैं, उनके लिए यह राशि बढ़ाकर 6,000 रुपये सालाना कर दी गई है। आंकड़ों की मानें तो पिछले साल ही इस योजना से 57 लाख से अधिक बच्चों को स्कूल से जोड़े रखने में कामयाबी मिली है। इसके अलावा, मैट्रिक पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए भी 5 लाख 37 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति दी गई है।
हॉस्टल में अब घर जैसा अहसास, बढ़ा अनुदान, मिल रहा मुफ्त राशन
घर से दूर रहकर पढ़ाई करना किसी चुनौती से कम नहीं होता, खासकर तब जब जेब खाली हो। जननायक कर्पूरी ठाकुर और अन्य पिछड़ा वर्ग छात्रावासों में रहने वाले छात्रों के लिए सरकार ने अपनी जेब खोल दी है। इस साल 1 जनवरी 2026 से इन हॉस्टलों में रहने वाले छात्र-छात्राओं का मासिक अनुदान 1,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 2,000 रुपये महीना कर दिया गया है। सिर्फ यही नहीं, हर महीने बच्चों को 15 किलो मुफ्त अनाज भी दिया जा रहा है, जिसमें 9 किलो चावल और 6 किलो गेहूं शामिल है, ताकि वे बिना किसी चिंता के सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगा सकें।
मुफ्त कोचिंग और हुनर सिखाने का इंतजाम
राज्य के 36 जिलों में चल रहे 38 प्राक् परीक्षा प्रशिक्षण केंद्रों में आज 4,100 से ज्यादा छात्र-छात्राएं बिना एक भी पैसा खर्च किए यूपीएससी, बीपीएससी, एसएससी और रेलवे जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। किताबें खरीदने के लिए भी सरकार उन्हें 3,000 रुपये की मदद दे रही है। वहीं, जो युवा पढ़ाई के साथ-साथ कोई हुनर (स्कील) सीखना चाहते हैं, उनके लिए बिहार कौशल विकास मिशन के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, कपड़ा बुनाई और रिटेल सेक्टर में मुफ्त ट्रेनिंग का इंतजाम है, जिससे अब तक 5,400 से ज्यादा युवा आत्मनिर्भर बन चुके हैं।
इसके साथ ही, विभाग के अंतर्गत चलने वाले कन्या आवासीय स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए टीआरई-4 के तहत 478 नए शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिसमें पीजीटी, टीटीटी और प्रधानाध्यापक के पद शामिल हैं।
भविष्य का विजन – हाथ में होगा 50,000 का लैपटॉप
मंत्री रमा निषाद ने भविष्य की जो योजनाएं साझा की, वे किसी भी छात्र को रोमांचित कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि सरकार जल्द ही ‘मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग अभ्युदय योजना’ शुरू करने जा रही है। इसके तहत मेधावी बच्चों को देश के नामचीन संस्थानों के माध्यम से जेईई, नीट, क्लैट और निफ्ट जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इतना ही नहीं, जो छात्र विदेश जाकर पढ़ना चाहते हैं, उन्हें भी वित्तीय मदद दी जाएगी।
सबसे बड़ी घोषणा यह रही कि हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ने के लिए सरकार 50,000 रुपये तक का नया लैपटॉप देने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। अनुमंडल और जिला स्तर पर नए आवासीय विद्यालय भी बनाए जा रहे हैं।
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