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Patna : खुरपी से गीली मिट्टी को सहलाते हाथ, कल्पतरु और रुद्राक्ष की नई कोपलों से छनकर आती सुबह की धूप और चेहरे पर अपनी धरती को संवारने का एक गहरा विश्वास… रविवार की सुबह पटना के लोक सेवक आवास परिसर का यह नजारा बदलते बिहार की आबो-हवा को नए सिरे से गढ़ने का एक जीवंत शंखनाद था। बिहार पृथ्वी दिवस 2026 के इस खास मौके पर जब सीएम सम्राट चौधरी ने कल्पतरु और रुद्राक्ष के नन्हे पौधों की जड़ों में पानी सींचा, तो दरअसल वे राज्य के हर नागरिक के दिल में एक नई सोच का बीज बो रहे थे। उन्होंने साफ शब्दों में संदेश दिया कि पर्यावरण का संतुलन बड़े-बड़े सम्मेलनों, लंबे-चौड़े भाषणों या कागजी फाइलों से नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की उन नन्हीं आदतों से सुधरेगा जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
छोटी-छोटी आदतें और पर्यावरण का बड़ा सुरक्षा कवच
कार्यक्रम के दौरान सीएम सम्राट चौधरी ने राज्य की जनता के नाम एक बेहद खास संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को संभालना बहुत मुश्किल काम नहीं है, अगर हम अपनी कुछ पुरानी और अच्छी आदतों को वापस अपनी जिंदगी में शामिल कर लें। इसी सोच के साथ सरकार ने इस बार 11 सूत्री संकल्प जारी किया है।
इस संकल्प में कोई बहुत भारी-भरकम वैज्ञानिक बातें नहीं हैं, बल्कि वे बातें हैं जो हमारे घरों और मोहल्लों से जुड़ी हैं। जैसे, हर इंसान साल में कम से कम एक पौधा जरूर लगाए और उसे सिर्फ लगाकर भूले नहीं, बल्कि बच्चे की तरह पाल-पोसकर बड़ा पेड़ बनाए। इसी तरह अपने आसपास के पोखरों, नदियों और तालाबों में कचरा न फेंकने और दूसरों को भी इसके लिए टोकने की सलाह दी गई है।

नल की टोंटी बंद करने से लेकर चिड़ियों के दाने-पानी तक का ख्याल
घर की चौखट के भीतर हम प्रकृति को कैसे बचा सकते हैं, इसका पूरा लेखा-जोखा इन संकल्पों में दिखता है। अक्सर हम मंजन करते समय या हाथ धोते समय नल खुला छोड़ देते हैं, जिसे तुरंत बंद करने की आदत डालने को कहा गया है। बिजली की बचत के लिए कमरे से निकलते ही स्विच ऑफ करना, बारिश के पानी को सहेजने के तरीके ढूंढना और प्लास्टिक की थैलियों को पूरी तरह अलविदा कहकर कपड़े का झोला हाथ में थामना, ये सब इस संकल्प का हिस्सा हैं।
बात यहीं खत्म नहीं होती। इस मुहीम में बेजुबान पशु-पक्षियों का भी ध्यान रखा गया है। गर्मी और धूप में छतों पर चिड़ियों के लिए दाना-पानी रखना, छोटी दूरियों के लिए बाइक या कार की जगह पैदल चलना या साइकिल चलाना, और बेवजह कागज बर्बाद न करना जैसी बातें भी शामिल हैं। कुल मिलाकर संदेश साफ है कि साफ-सफाई और खुले में शौच न करने जैसी बुनियादी आदतें ही हमारी पृथ्वी को सेहतमंद रख सकती हैं।
इस दौरान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर और मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने भी मुख्यमंत्री के साथ मिलकर इस जन-अभियान को राज्य के कोने-कोने तक पहुंचाने का भरोसा जताया।
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